
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उनके अनुसार, शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। ट्रम्प ने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे।
डिजिटल हस्ताक्षर का दावा, लेकिन मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि ट्रम्प, जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पहले ही डिजिटल रूप से समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। हालांकि समझौते का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि आधिकारिक दस्तावेज शुक्रवार के बाद जारी किया जाएगा।
14 बिंदुओं का प्रारंभिक मसौदा तैयार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों के बीच 14 बिंदुओं वाला प्रारंभिक मसौदा तैयार किया गया है। इस पर आगे तकनीकी स्तर की बातचीत होगी। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि ईरान को आर्थिक सहायता के लिए करीब ₹28 लाख करोड़ का पैकेज मिल सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जेडी वेंस बोले- भविष्य में इजराइल भी जुड़ सकता है
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में इजराइल भी इस पीस डील का हिस्सा बनेगा। NBC News को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि समझौते को लेकर ईरानी और इजराइली मीडिया में कई भ्रामक जानकारियां सामने आ रही हैं। उनके मुताबिक जब इजराइल के लोग समझौते की वास्तविक शर्तें जानेंगे तो वे इसका समर्थन करेंगे।
नेतन्याहू ने किया अलग रुख साफ
दूसरी ओर, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि उनका देश इस समझौते का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित परमाणु समझौते की शर्तों की जानकारी इजराइल को नहीं है। नेतन्याहू ने दोहराया कि "समझौता हो या न हो, ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे।" उनका दावा है कि इजराइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से ईरान से उत्पन्न तत्काल खतरे को काफी हद तक कम किया गया है।
ईरान में अब भी संशय का माहौल
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के भीतर बड़ी संख्या में लोग अब भी इस पीस डील को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। उनका मानना है कि अभी कई महत्वपूर्ण मुद्दे अनसुलझे हैं, जिनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंध, विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियां और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से जुड़े मसले शामिल हैं।
कट्टरपंथी गुटों ने भी जताया विरोध
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के कट्टरपंथी गुट इस संभावित समझौते से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार को बातचीत में अधिक सख्त रुख अपनाना चाहिए था। सरकार समर्थक सभाओं में भी कई लोगों ने अमेरिका के साथ समझौते का विरोध करते हुए कहा कि ईरान को वॉशिंगटन के सामने झुकना नहीं चाहिए।
अभी कई सवालों के जवाब बाकी
हालांकि ट्रम्प ने समझौते को लगभग अंतिम रूप देने का दावा किया है, लेकिन अभी तक न तो समझौते का पूरा दस्तावेज सार्वजनिक हुआ है और न ही आर्थिक पैकेज या अन्य प्रमुख शर्तों की आधिकारिक पुष्टि हुई है। ऐसे में शुक्रवार को प्रस्तावित हस्ताक्षर और उसके बाद जारी होने वाले दस्तावेज पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
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