
मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और इसी बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance पाकिस्तान रवाना हो गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होगी या हालात और बिगड़ेंगे?
ट्रम्प के बयान से उलट कदम
कुछ दिन पहले ही Donald Trump ने कहा था कि जेडी वेंस पाकिस्तान नहीं जाएंगे। लेकिन अब उनके अचानक दौरे ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इससे संकेत मिल रहा है कि पर्दे के पीछे बातचीत की कोशिशें तेज हो सकती हैं।
21 घंटे की बातचीत, फिर भी नहीं बनी बात
11-12 अप्रैल को JD Vance ने ईरान के साथ बातचीत में अमेरिकी डेलिगेशन का नेतृत्व किया था। करीब 21 घंटे चली वार्ता के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया। मतभेद खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और Strait of Hormuz पर नियंत्रण को लेकर बने हुए हैं।
जहाज कब्जे के बाद बढ़ा तनाव
हाल ही में अमेरिका ने ईरानी जहाज ‘टूस्का’ को कब्जे में लिया, जिससे विवाद और बढ़ गया। ईरान ने इसे “समुद्री डकैती” बताया और जवाब देने की चेतावनी दी। यानी अब मामला सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि सैन्य तनाव तक पहुंच चुका है।
पाकिस्तान में वार्ता पर अनिश्चितता
इस्लामाबाद में संभावित दूसरे दौर की बातचीत को लेकर स्थिति साफ नहीं है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई और “धमकी भरी भाषा” का हवाला देते हुए इसमें शामिल होने पर संशय जताया है। ऐसे में बातचीत होने की संभावना फिलहाल कमजोर नजर आ रही है।
क्या हो सकता है अस्थायी समझौता?
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोशिश की जा रही है कि एक अस्थायी समझौता (MoU) हो जाए। इससे करीब 60 दिन का समय मिल सकता है, जिसमें बड़ा शांति समझौता तैयार किया जा सके। लेकिन यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान बातचीत में शामिल होता है या नहीं।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट
- ईरान ने होर्मुज में 2 भारतीय जहाजों पर फायरिंग की
- स्ट्रेट को दोबारा बंद करने का दावा
- दूसरी बैठक में शामिल होने से इनकार
- तेल कीमतों में 6.5% उछाल, ब्रेंट क्रूड $96.27 प्रति बैरल
- Donald Trump की चेतावनी—“यह आखिरी मौका”
वैश्विक असर: तेल से लेकर सुरक्षा तक खतरा
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है। यानी यह टकराव अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या?
अमेरिका बातचीत की कोशिश में है, लेकिन ईरान का रुख सख्त बना हुआ है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि हालात कूटनीति की ओर बढ़ेंगे या टकराव और गहराएगा। दुनिया की नजर अब इस संभावित वार्ता और उसके नतीजों पर टिकी हुई है…
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