
अमेरिका में रूस से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम की दिशा में नई पहल हुई है। अमेरिकी सीनेट में पेश एक द्विदलीय बिल में भारत, चीन समेत पांच देशों से आयात होने वाले सामान पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले सीनेट, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और अंत में राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
किन देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव
बिल में भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान को शामिल किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार इन देशों से अमेरिका आने वाले उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकेगा।
पहले तैयार मसौदे में 500% टैरिफ का प्रावधान रखा गया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया।
रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति
प्रस्ताव का उद्देश्य उन देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है जो रूस से तेल खरीदकर उसकी आय बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। बिल में रूस के खिलाफ भी कई नए प्रतिबंधों का सुझाव दिया गया है। इनमें शामिल हैं—
रूस का ऊर्जा क्षेत्र
वित्तीय संस्थान
रक्षा औद्योगिक ढांचा
प्रमुख कारोबारी
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध
यदि यह कानून बनता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर केवल रूस से तेल खरीदने के आधार पर टैरिफ लगाने की नीति अपनाएगा।
15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित टैरिफ से छूट
सीनेट में पेश प्रस्ताव के अनुसार 15 यूरोपीय देशों को 100% टैरिफ से बाहर रखा गया है।
इसका कारण यह बताया गया है कि ये देश रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे अपनी निर्भरता भी घटा रहे हैं।
डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह कदम यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन देशों को लक्ष्य बनाता है जो अभी भी रूस के तेल कारोबार को आर्थिक समर्थन दे रहे हैं।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों का समर्थन
रूस से जुड़े इस प्रस्ताव को अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिला है। इसे बाइपार्टिसन बिल माना जा रहा है। अमेरिकी राजनीति में दोनों दलों का एक साथ किसी प्रस्ताव के पक्ष में आना उसकी मंजूरी की संभावना को मजबूत माना जाता है।
कानून बनने से पहले पूरी करनी होगी प्रक्रिया
यह बिल अभी अंतिम रूप से पारित नहीं हुआ है। कानून बनने के लिए इसे पहले सीनेट, फिर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर ही यह लागू हो सकेगा।
अप्रैल 2025 में पेश हुआ था प्रस्ताव
इस बिल को पहली बार अप्रैल 2025 में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पेश किया था। अब तक 26 सीनेटर इसका समर्थन कर चुके हैं और आगे समर्थन बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
ग्राहम के निधन के बाद बिल पर फिर चर्चा
11 जुलाई को सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया। निधन से एक दिन पहले यूक्रेन यात्रा के दौरान उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बिल को आगे बढ़ाने के लिए सहमत हो गए हैं।
व्हाइट हाउस में ट्रम्प ने कहा कि यह ग्राहम के सम्मान से जुड़ा विषय है और इसके कानून बनने की अच्छी संभावना है।
बाद में कैपिटल हिल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के सीनेटर एक साथ दिखाई दिए और उन्होंने इस प्रस्ताव को ग्राहम के प्रति श्रद्धांजलि बताया।
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