स्पोर्ट्स डेस्क, न्यूज़ वर्ल्ड। टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के सदस्य व 24 नवंबर से उड़ीसा के भुवनेश्वर में शुरू होने जा रहे जूनियर विश्वकप में भारत के कप्तान मध्य प्रदेश के सपूत विवेक सागर को महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को दिल्ली में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।
देश में खेल क्षेत्र के इस प्रतिष्ठित एवार्ड की शुरुआत 1961में हुई थी और तब से आज 2021 तक सिर्फ तीन अवसर ऐसे आए हैं जब पुरुष वर्ग में मध्य प्रदेश के किसी हॉकी खिलाड़ी को इस पुरस्कार से नवाजा गया है।
पहली बार यह एवार्ड 1964 में शंकर लक्ष्मण को सन 2000 में पूर्व ओलंपियन सैय्यद जलालुद्दीन रिजवी को मिला था जिन्होंने 1984 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और तीसरा मौका आज है जब यह पुरस्कार इक्कीस वर्षीय विवेक सागर को दिया गया है।
विवेक को भारत सरकार द्वारा यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने के बाद मध्य प्रदेश के कुछ पूर्व हॉकी ओलंपियन एवं अन्य खिलाड़ियों से जब न्यूज वर्ल्ड ने बात की तो उनकी प्रतिक्रिया इस प्रकार थी।
सैयद जलालुद्दीन रिजवी अर्जुन एवार्डी एवं पूर्व ओलंपियन
देश के पूर्व ओलंपियन सैयद जलालुद्दीन रिजवी ने न्यूज़ वर्ल्ड से खास बातचीत करते हुए विवेक सागर को जहां पुरस्कार मिलने की बधाई दी तो वहीं उनको जूनियर विश्वकप के लिए उनको शुभ कामनाएं देते हुए उनकी कप्तानी पर विश्वास भी जताते हुए कहा कि विवेक की उम्र भले ही कम है किंतु उनके खेल में परिपक्वता देखने लायक है।
मीर रंजन नेगी पूर्व ओलंपियन
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर ओलंपियन मीर रंजन नेगी का पहला रिएक्शन था यह पूर्व ओलंपियन अशोक ध्यानचंद जी की खोज है वही विवेक सागर को तलाश कर लाए थे अच्छा खिलाड़ी है बहुत आगे जाने की क्षमताएं हैं लेकिन खेल क्षेत्र के इस प्रतिष्ठित पुरस्कार देने में थोड़ी जल्दी कर दी वह अभी जूनियर खेल रहा है अर्जुन अवॉर्ड बहुत बड़ा है।
असलम शेर खान पूर्व ओलंपियन
1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के महत्वपूर्ण सदस्य असलम शेर खान से यह पूछा तो वह मुस्करा कर चुप हो गए।
इनाम उर रहमान पूर्व ओलंपियन
हमारे मध्य प्रदेश की हॉकी के चमत्कारिक बालक विवेक को ढेरों आशीर्वाद एवं बधाई इस लड़के में आगे बढ़ने की बहुत दम है लेकिन थोड़ा सा पॉलिश करने के बाद अगर यह पुरस्कार दिया जाता तो ज्यादा अच्छा होता क्योंकि यह बहुत बड़ा पुरस्कार है और इसके अपने महत्व है फिर भी चलो सरकार को मध्य प्रदेश के हॉकी खिलाड़ी याद तो आए।
जलज चतुर्वेदी पूर्व हॉकी खिलाड़ी
विवेक को अर्जुन पुरस्कार मिलने पर हार्दिक बधाई, लोगों का यह कहना सच है कि अभी विवेक की शुरुआत है लेकिन परफोर्मेंस आज दी है और आज इतना बड़ा पुरस्कार मिलना उसे जिम्मेदार बनाएगा उसमें गंभीरता लाएगा यह भी नए प्रयोग की तरह है मुझे विश्वास है वह इस पर खरा उतरेगा।
पुरस्कारों से नजरंदाज हुए मध्य प्रदेश के हॉकी खिलाड़ी
1961 में शुरू हुए अर्जुन पुरस्कार को देखा जाए तो मध्यप्रदेश के शंकर लक्ष्मण को 1964 में फिर सन 2000 में जलालुद्दीन को यह पुरस्कार मिला था और उसके बाद अब विवेक सागर को मिला है यह बात सच है कि तीनों खिलाड़ियों ने अपने खेल कौशल के आधार पर इन पुरस्कारों को हासिल किया है लेकिन यह भी कड़वा सच है 1961 से लेकर 2021 तक मध्य प्रदेश में तमाम ऐसे हॉकी खिलाड़ी हुए जिन्हें अर्जुन पुरस्कार अथवा अन्य ऐसे बड़े पुरस्कार देने में सरकार ने तंग दिली दिखाई और वाकई नजरंदाज कर दिया इनमें कुछ तो ऐसे खिलाड़ी नजरअंदाज हो गए जिनके खेल कौशल को समूचे विश्व ने झुककर प्रणाम किया था वह चाहे इनाम उर रहमान रहे हो या असलम शेर खान और चाहे समीर दाद और मीर रंजन नेगी इनको एवार्डों के मामले में दर किनार करना पुरस्कार देने वालों के नाम चयन करने वालों के खेल ज्ञान और मंशा पर प्रश्न चिन्ह लगाता है और आलोचकों के उस आरोप पर भी मोहर लगता है कि खेल पुरस्कार राजनेताओं के इशारों पर मिलते हैं।
विवेक को अर्जुन पुरस्कार मिलने के बाद अगर सकारात्मकता की ओर बढ़ा जाए तो सरकारों के लिए सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है पुरस्कार कल भी आप देते थे और कल भी आप देंगे यह मनोबल बढ़ाते हैं लेकिन अगर उचित समय पर उचित व्यक्ति को न मिले तो मनोबल गिरा भी देते हैं।
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