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देवदत्त पडिक्कल ने नंबर-3 पर ठोका दावा, श्रीलंका में दो शतक से खत्म हुई भारत की तलाश

29 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
देवदत्त पडिक्कल ने नंबर-3 पर ठोका दावा, श्रीलंका में दो शतक से खत्म हुई भारत की तलाश
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 328 रन बनाकर नंबर-3 की जगह के लिए अपनी दावेदारी बेहद मजबूत कर दी। गॉल में 167 और कोलंबो में 117 रन की पारियों ने उन्हें सीरीज का प्लेयर ऑफ द सीरीज भी बनाया।


चोटिल साई सुदर्शन की जगह टीम में आए पडिक्कल ने स्पिन के खिलाफ अपने अलग बैकफुट गेम से भी प्रभावित किया। 109.33 के औसत से रन बनाने वाले पडिक्कल ने लगातार दो टेस्ट में शतक जड़े।


पुजारा के बाद लगातार बदलता रहा नंबर-3

टेस्ट टीम में नंबर-3 की भूमिका इसलिए अहम मानी जाती है क्योंकि इस स्थान पर बल्लेबाज को शुरुआती विकेट गिरने पर नई गेंद का सामना करने से लेकर मिडिल ऑर्डर को संभालने तक की जिम्मेदारी निभानी पड़ सकती है। राहुल द्रविड़ ने इस पोजिशन पर भारत के लिए 10 हजार से ज्यादा रन बनाए। उनके बाद चेतेश्वर पुजारा लंबे समय तक इस भूमिका में रहे। पुजारा ने 13 साल में 155 पारियों में 6529 रन बनाए। 11 जून 2023 को पुजारा के आखिरी टेस्ट के बाद भारत ने नंबर-3 पर 7 बल्लेबाजों को आजमाया।

  1. शुभमन गिल ने इस स्थान पर 972 रन बनाए।

  2. विराट कोहली और केएल राहुल ने भी नंबर-3 पर बल्लेबाजी की।

  3. कोहली के संन्यास के बाद गिल नंबर-4 पर चले गए।

  4. साई सुदर्शन ने लगभग 32 की औसत से 383 रन बनाए।

  5. करुण नायर और वॉशिंगटन सुंदर को भी इस पोजिशन पर अवसर मिला।


साई सुदर्शन की चोट ने खोला रास्ता

श्रीलंका दौरे से पहले साई सुदर्शन के चोटिल होने के बाद पडिक्कल को नंबर-3 पर मौका मिला। इससे पहले भारत A के लिए वह दो अर्धशतक लगा चुके थे और श्रीलंका के टूर गेम में 142 रन नाबाद बना चुके थे।


घरेलू क्रिकेट में भी उनका हालिया प्रदर्शन मजबूत रहा। 2025-26 फर्स्ट-क्लास सीजन में 812 रन बनाने के दौरान उनका औसत 47.76 रहा। ऑस्ट्रेलिया A के खिलाफ उन्होंने 150 रन, जबकि रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में 232 रन बनाए। कर्नाटक की कप्तानी करते हुए उन्होंने टीम को फाइनल तक पहुंचाया।


श्रीलंका में ऐसा रहा पडिक्कल का प्रदर्शन

दो टेस्ट की सीरीज में पडिक्कल ने तीन पारियों में कुल 328 रन बनाए। 

उनका बल्लेबाजी औसत 109.33 रहा।

गॉल टेस्ट पहली पारी: 167 रन

गॉल टेस्ट दूसरी पारी: 44 रन

कोलंबो टेस्ट: 117 रन

सीरीज में कुल: 328 रन

सीरीज औसत: 109.33

प्लेयर ऑफ द सीरीज: देवदत्त पडिक्कल


उनके दोनों शतक लगातार टेस्ट मैचों में आए। यह उनकी पहली ऐसी टेस्ट सीरीज थी जिसमें उन्होंने भारत के लिए सभी मैच खेले। इससे पहले 2024 में उन्हें इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक-एक टेस्ट खेलने का मौका मिला था।


स्पिन के खिलाफ बैकफुट बना पडिक्कल का हथियार

हाल के समय में स्पिन के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों की परेशानी सामने आई है। न्यूजीलैंड के स्पिनर्स ने तीन टेस्ट में 37 विकेट लिए और उनका गेंदबाजी औसत 23.48 रहा। भारत में दक्षिण अफ्रीकी स्पिनर्स ने दो टेस्ट में 25 विकेट लिए और 15.48 का औसत दर्ज किया। पडिक्कल ने इस चुनौती के खिलाफ अलग रणनीति अपनाई। श्रीलंका सीरीज में स्पिनर्स की लेंथ गेंदों पर उन्होंने 37.4% गेंदें बैकफुट से खेलीं। कोलंबो में 117 रन की पारी के दौरान स्पिन के खिलाफ उनके बैकफुट शॉट्स से 52 रन आए। इनमें 47 रन लेंथ गेंदों पर बने। सीरीज में स्पिन के खिलाफ उनका स्ट्राइक रेट करीब 65 रहा।


लंबाई से भी मिला शॉट्स को फायदा

6 फीट 3 इंच लंबे पडिक्कल अच्छी लेंथ की गेंद को भी पीछे जाकर खेलने में सक्षम हैं। कट, पंच और पुल उनके बैकफुट गेम के प्रमुख शॉट हैं। आमतौर पर स्पिन के खिलाफ भारतीय बल्लेबाज गेंद की पिच तक पहुंचकर फ्रंटफुट पर खेलने को प्राथमिकता देते हैं। पडिक्कल का तरीका इससे अलग दिखाई देता है।


साई सुदर्शन से कितना अलग है खेल?

पडिक्कल और साई सुदर्शन दोनों ही स्पिन की लेंथ गेंदों के खिलाफ बैकफुट का इस्तेमाल करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक सुदर्शन ने ऐसी गेंदों पर 36.5% बार बैकफुट का सहारा लिया, जबकि पडिक्कल का आंकड़ा 37.4% है।


मुख्य अंतर रन बनाने की गति में है। पडिक्कल के बैकफुट शॉट्स का स्ट्राइक रेट करीब 50 रहा, जबकि सुदर्शन का इसी तरह के शॉट्स पर स्ट्राइक रेट सिंगल डिजिट में रहा।


जूनियर क्रिकेट से लगातार मजबूत हुआ रिकॉर्ड

पडिक्कल ने जूनियर स्तर पर ही बड़ी पारियां खेलनी शुरू कर दी थीं। 2018 कूच बिहार ट्रॉफी में उन्होंने 829 रन बनाए और टूर्नामेंट के चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे।


सीनियर क्रिकेट में उनका बड़ा प्रदर्शन 2019-20 विजय हजारे ट्रॉफी में आया। उन्होंने 609 रन बनाकर टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाए और इसी दौरान अपना पहला लिस्ट-A शतक भी लगाया।


इसके बाद 2025-26 फर्स्ट-क्लास सीजन में 812 रन ने टेस्ट टीम में उनकी दावेदारी को और मजबूत किया।


IPL में शानदार शुरुआत से लगातार उतार-चढ़ाव

पडिक्कल ने 2020 में RCB के लिए IPL डेब्यू किया। शुरुआती चार मैचों में तीन अर्धशतक लगाने वाले इस बल्लेबाज ने पूरे सीजन में 473 रन बनाए और इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर चुने गए। 2021 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ उन्होंने नाबाद 101 रन बनाकर पहला IPL शतक लगाया। राजस्थान रॉयल्स के लिए दो सीजन में उन्होंने 28 मैचों में 637 रन बनाए। 2024 में लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए उनका औसत केवल 5.43 रहा। इसके बाद 2025 और 2026 में RCB की खिताबी टीम का हिस्सा रहते हुए उन्होंने लगातार दो IPL ट्रॉफी जीतने में योगदान दिया।

2025: 10 मैच, 247 रन

2026: 16 मैच, 464 रन


टेस्ट करियर की शुरुआत भी रही यादगार

पडिक्कल ने 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया और पहली पारी में 65 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया के 2024-25 दौरे पर उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। वहां उनकी दोनों पारियों में 0 और 25 रन रहे। श्रीलंका के खिलाफ प्रदर्शन ने हालांकि टेस्ट स्तर पर उनकी स्थिति को बदलने का मजबूत आधार तैयार कर दिया है।


द्रविड़ और पुजारा ने भी रखी अपनी राय

गॉल टेस्ट में पडिक्कल की 167 रन की पारी के बाद राहुल द्रविड़ ने उनकी तारीफ की। द्रविड़ के मुताबिक, साई सुदर्शन की अनुपस्थिति में मिले अवसर का पडिक्कल ने बेहतरीन इस्तेमाल किया और नंबर-3 पर बड़ी पारी खेली।


पडिक्कल के अनुसार, कर्नाटक क्रिकेट में द्रविड़ उनके लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाते रहे हैं। वह KSCA में उनसे मिलकर जरूरी सलाह लेने के लिए उपलब्ध रहते हैं।


चेतेश्वर पुजारा ने भी पडिक्कल को नंबर-3 पर लगातार अवसर दिए जाने की वकालत की है। उनके अनुसार घरेलू क्रिकेट और IPL में किए प्रदर्शन से पडिक्कल इस मौके के लिए तैयार थे और उन्होंने अपनी तकनीक पर भी काम किया है।

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