
मुंबई। IPL में करोड़ों खर्च कर खरीदे गए खिलाड़ी मैदान से दूर हैं। सीजन का एक-तिहाई हिस्सा बीत चुका है, लेकिन कई बड़े नाम अब भी बेंच पर बैठे हैं।
करोड़ों खर्च, लेकिन मैदान से दूरी क्यों?
IPL ऑक्शन में टीमों ने बड़े खिलाड़ियों पर जमकर पैसा बहाया, लेकिन अब वही खिलाड़ी प्लेइंग इलेवन से बाहर हैं। 1 करोड़ या उससे ज्यादा कीमत वाले 41 खिलाड़ी या तो एक भी मैच नहीं खेले या सिर्फ 1-2 मुकाबलों तक सीमित रहे हैं। यह आंकड़ा सिर्फ हैरान नहीं करता, बल्कि टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर भी सवाल खड़े करता है। आखिर इतने बड़े निवेश का फायदा कब मिलेगा?
ये हैं सबसे महंगे लेकिन कम खेले खिलाड़ी
इस सीजन में कुछ बड़े नाम ऐसे हैं जिन्हें या तो मौका ही नहीं मिला या बहुत कम खेल पाए।
पथिराना (₹18 करोड़) – 0 मैच
कमिंस (₹18 करोड़) – 0 मैच
मिचेल स्टार्क (₹11.75 करोड़) – 0 मैच
मयंक यादव (₹11 करोड़) – 0 मैच
जेसन होल्डर (₹7 करोड़) – 0 मैच
इतने बड़े खिलाड़ियों का बाहर बैठना दिखाता है कि सिर्फ कीमत ही प्लेइंग इलेवन तय नहीं करती। लेकिन फिर सवाल उठता है—टीम कॉम्बिनेशन ज्यादा अहम है या निवेश?
200 करोड़ से ज्यादा की ‘बेंच स्ट्रेंथ’
टीमों ने अपनी बेंच पर बैठे खिलाड़ियों पर ही ₹200 करोड़ से ज्यादा खर्च कर दिए हैं।
सबसे ज्यादा खर्च वाली टीमें:
सनराइजर्स – ₹34 करोड़
लखनऊ – ₹33.20 करोड़
दिल्ली – ₹29.95 करोड़
चेन्नई – ₹29.70 करोड़
कोलकाता – ₹23 करोड़
दिलचस्प बात यह है कि इन टीमों में से सिर्फ दिल्ली ही टॉप-4 में है। यानी ज्यादा खर्च हमेशा बेहतर प्रदर्शन की गारंटी नहीं देता।
क्या महंगी बेंच टीम पर भारी पड़ रही है?
चेन्नई और कोलकाता जैसी टीमें पॉइंट्स टेबल में निचले पायदान पर हैं। यह साफ इशारा है कि संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा। वहीं, मुंबई ने सिर्फ ₹6.25 करोड़ की बेंच रखी है, फिर भी प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं है। यानी कम खर्च भी सफलता की गारंटी नहीं देता—रणनीति ही असली गेम चेंजर है।
इम्पैक्ट प्लेयर नियम बना बड़ा कारण
इस सीजन में ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम ने टीम कॉम्बिनेशन पूरी तरह बदल दिया है। अब टीमें 11 नहीं, बल्कि 12 खिलाड़ियों का इस्तेमाल कर रही हैं। इस वजह से कई ऑलराउंडर, जिन्हें भारी कीमत पर खरीदा गया था, बाहर हो रहे हैं—क्योंकि वे किसी एक विभाग में पूरी तरह फिट नहीं बैठते। यानी IPL अब सिर्फ स्टार पावर का खेल नहीं रहा, बल्कि स्मार्ट चयन और सही टाइमिंग का बन गया
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