
18 साल तक ट्रॉफी का इंतजार करने वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने अब IPL में अपनी अलग पहचान बना ली है। लगातार दूसरे सीजन खिताब जीतकर टीम ने उन सभी आलोचनाओं का जवाब दे दिया है जो कभी उसे "अंडरअचीवर" कहा करती थीं। IPL 2026 के फाइनल में गुजरात को 5 विकेट से हराने के साथ बेंगलुरु ने साबित कर दिया कि चैंपियन सिर्फ स्टार खिलाड़ियों से नहीं, बल्कि मजबूत टीम कॉम्बिनेशन से बनते हैं।
लगातार दूसरी ट्रॉफी के साथ इतिहास में दर्ज हुआ नाम
कप्तान लगातार दो IPL खिताब जीतने वाले चुनिंदा कप्तानों की सूची में शामिल हो गए। उनसे पहले केवल और ही यह उपलब्धि हासिल कर सके थे। यह उपलब्धि सिर्फ ट्रॉफी जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि टीम ने दबाव वाले मुकाबलों में खुद को किस तरह बेहतर बनाया।
टॉप ऑर्डर बना सबसे बड़ी ताकत
पूरे सीजन में RCB की बल्लेबाजी उसकी सबसे बड़ी ताकत रही। ने 16 मैचों में 675 रन बनाकर टीम की बल्लेबाजी की रीढ़ का काम किया। फाइनल में उनकी नाबाद 75 रन की पारी ने जीत की नींव रखी। वहीं रजत पाटीदार ने 501 रन और देवदत्त पडिक्कल ने 464 रन बनाकर टॉप ऑर्डर को मजबूत बनाए रखा। इन तीन बल्लेबाजों ने मिलकर 1640 रन जोड़े, जिससे मिडिल ऑर्डर पर दबाव बेहद कम रहा।
गेंदबाजी यूनिट ने बनाया फर्क
जहां बल्लेबाज रन बना रहे थे, वहीं गेंदबाज मैच जिताने का काम कर रहे थे। भुवनेश्वर कुमार ने 28 विकेट लेकर आक्रमण की अगुआई की। रसिख सलाम ने 19 विकेट और जोश हेजलवुड ने 15 विकेट लेकर विपक्षी बल्लेबाजों को लगातार दबाव में रखा। स्पिन विभाग में क्रुणाल पंड्या ने बल्ले और गेंद दोनों से कमाल किया। उन्होंने 226 रन बनाने के साथ 14 विकेट भी हासिल किए। यही संतुलन RCB को बाकी टीमों से अलग बनाता रहा।
8 खिलाड़ियों ने निभाई मैच विनर की भूमिका
चैंपियन टीम की सबसे बड़ी पहचान उसके मैच विनर्स होते हैं और RCB के पास उनकी भरमार थी। पूरे सीजन में टीम के 8 अलग-अलग खिलाड़ी प्लेयर ऑफ द मैच बने। कोहली ने सबसे ज्यादा 3 बार यह सम्मान जीता, जबकि हेजलवुड, टिम डेविड, जैकब डफी, वेंकटेश अय्यर, भुवनेश्वर कुमार, रजत पाटीदार और फिल सॉल्ट ने भी अहम मौकों पर टीम को जीत दिलाई। यही कारण रहा कि टीम कभी किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं दिखी।
घरेलू मैदान बना जीत का किला
RCB ने अपने घरेलू मैदानों का भरपूर फायदा उठाया। टीम ने घर में खेले गए 7 में से 6 मुकाबले जीते और लगभग 86 प्रतिशत जीत दर्ज की। चिन्नास्वामी स्टेडियम और रायपुर दोनों जगह टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि पूरे टूर्नामेंट में टीम कभी लगातार दो से ज्यादा मैच नहीं हारी।
कोहली की निरंतरता बनी सबसे बड़ी ताकत
विराट कोहली का यह लगातार चौथा IPL सीजन रहा जिसमें उन्होंने 600 से ज्यादा रन बनाए। ओपनिंग पार्टनर बदलते रहे, लेकिन उनके प्रदर्शन में कोई गिरावट नहीं आई। फिल सॉल्ट की चोट और लगातार बदलावों के बावजूद कोहली ने टीम को स्थिरता दी। बड़े मैचों में उन्होंने जिम्मेदारी संभाली और दूसरे बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका दिया।
RCB की सफलता का असली मंत्र
RCB की दूसरी लगातार ट्रॉफी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि IPL सिर्फ बड़े नामों के भरोसे नहीं जीता जाता। संतुलित बल्लेबाजी, मजबूत गेंदबाजी, कई मैच विनर्स और शानदार कप्तानी ही किसी टीम को चैंपियन बनाती है। कभी ट्रॉफी के लिए तरसने वाली RCB अब IPL की नई पावरहाउस टीम बन चुकी है।
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