
क्रिकेट की दुनिया तेजी से बदल रही है। कभी बड़ी टीमें एसोसिएट देशों को हल्के में लेती थीं, लेकिन अब हालात उलटते नजर आ रहे हैं। टी-20 वर्ल्ड कप के शुरुआती मुकाबलों में नेपाल, नीदरलैंड और अमेरिका जैसी टीमों ने दिग्गजों को कड़ी टक्कर देकर साफ कर दिया है कि अब मैदान पर कोई भी मुकाबला आसान नहीं रहा।
नेपाल ने इंग्लैंड को किया परेशान
2022 की विश्व चैंपियन इंग्लैंड के सामने नेपाल की टीम जब उतरी, तो ज्यादातर लोगों ने एकतरफा मैच की उम्मीद की थी। लेकिन मैदान पर कहानी बिल्कुल अलग रही।
नेपाल के स्पिनरों ने इंग्लैंड के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और टीम को 200 रन तक भी नहीं पहुंचने दिया। इंग्लैंड ने 184 रन बनाए, जबकि नेपाल लक्ष्य का पीछा करते हुए 180 तक पहुंच गया और मुकाबला आखिरी ओवर तक खींच दिया।
दिलचस्प बात यह रही कि दोनों टीमों के खिलाड़ियों की कमाई में जमीन-आसमान का फर्क है। जहां इंग्लैंड के खिलाड़ी एक टी-20 मैच में लाखों रुपए कमाते हैं, वहीं नेपाल के खिलाड़ियों को एक मैच के करीब 3500 रुपए ही मिलते हैं। इसके बावजूद उन्होंने जज्बे से खेल दिखाया।
नीदरलैंड ने पाकिस्तान को दी कड़ी टक्कर
नीदरलैंड को अब ‘छोटी टीम’ कहना मुश्किल हो गया है। टीम पहले भी बड़े उलटफेर कर चुकी है और इस बार भी पाकिस्तान के खिलाफ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
नीदरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 147 रन बनाए। पाकिस्तान एक समय 98/2 पर मजबूत स्थिति में था, लेकिन नीदरलैंड ने शानदार वापसी करते हुए स्कोर 100/5 कर दिया।
आखिरी ओवर में फहीम अशरफ का कैच छूटना पाकिस्तान के लिए राहत बन गया और टीम 3 विकेट से मुकाबला जीत सकी।
अमेरिका बना नया ‘जायंट किलर’
अमेरिका की टीम भी इस वर्ल्ड कप में सबको चौंका रही है। टीम ने हाल के सालों में बड़े मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन किया है और पाकिस्तान को भी हराने का कारनामा कर चुकी है। भारत के खिलाफ मैच में अमेरिका ने बेहतरीन रणनीति अपनाते हुए पावरप्ले में ही चार विकेट निकाल दिए। तेज गेंदबाज शैडली वान शाल्कविक ने चार विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी को दबाव में रखा। हालांकि कप्तान सूर्यकुमार यादव की अर्धशतकीय पारी के दम पर भारत ने 160 से ज्यादा रन बनाए और अंत में मुकाबला 29 रन से जीत लिया।
एसोसिएट टीमों का प्रदर्शन क्यों सुधरा?
क्रिकेट विशेषज्ञों के अनुसार एसोसिएट देशों के बेहतर प्रदर्शन के पीछे कई बड़े कारण हैं।
मैचों की बढ़ती संख्या:
पहले इन टीमों को साल में कुछ ही मुकाबले मिलते थे, लेकिन अब आईसीसी के नए शेड्यूल और लीग क्रिकेट की वजह से खिलाड़ियों को ज्यादा अनुभव मिल रहा है।
अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी:
अमेरिका और कनाडा जैसी टीमों में भारत, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के घरेलू क्रिकेट खेलने वाले अनुभवी खिलाड़ी शामिल हैं।
बेहतर कोचिंग और स्ट्रैटजी:
इन टीमों के साथ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोच और एनालिस्ट जुड़े हैं, जो रणनीति और प्लानिंग में मदद कर रहे हैं।
टी-20 फॉर्मेट का असर:
टी-20 क्रिकेट में कुछ ओवर का अच्छा खेल पूरे मैच का रुख बदल सकता है। इसी वजह से कमजोर मानी जाने वाली टीमें भी बड़ा उलटफेर कर सकती हैं।
निडर रवैया:
एसोसिएट टीमों पर हार-जीत का दबाव कम होता है, इसलिए वे खुलकर खेलती हैं, जबकि बड़ी टीमों पर प्रतिष्ठा बचाने का दबाव रहता है।
अच्छा खेल, लेकिन जीत से दूर क्यों?
नेपाल, नीदरलैंड और अमेरिका ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन कई मुकाबलों में जीत हासिल नहीं कर सके।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसका सबसे बड़ा कारण दबाव में अनुभव की कमी है। आखिरी ओवरों में बड़ी टीमें अपने अनुभव से मैच पलट देती हैं, जबकि एसोसिएट टीमों के पास ऐसी परिस्थितियों का अनुभव कम होता है। इसके अलावा इन टीमों की बेंच स्ट्रेंथ भी सीमित होती है, जिससे चोट या बदलाव की स्थिति में टीम कमजोर पड़ जाती है।
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