
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinhaरिपोर्ट - मनमोहन नेताम
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद ज़िले स्थित उदंती टाइगर रिजर्व से कीमती सागौन लकड़ी की तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। तस्कर, मशहूर फ़िल्म 'पुष्पा' की तर्ज पर, जंगल की कीमती लकड़ी को नदी के बहाव के सहारे ओडिशा पहुंचा रहे थे। वन विभाग की सतर्कता से इस गंभीर अपराध का भंडाफोड़ हुआ है। तस्करों द्वारा उदंती नदी को माध्यम बनाकर सागौन लकड़ी के लट्ठों को बहाव में बहाकर राज्य की सीमा पार कर ओडिशा भेजा जा रहा था।
तरीका बिल्कुल फिल्मी, लेकिन सच्चाई बेहद गंभीर
तस्कर जंगल में अवैध कटाई कर लकड़ी को नदी किनारे इकट्ठा करते, फिर उन्हें नदी में बहा देते थे। तेज बहाव की मदद से ये लट्ठे छत्तीसगढ़ की सीमा पार कर ओडिशा पहुंच जाते थे, जहां उन्हें गिरोह के अन्य सदस्य उठाकर बाज़ार में बेचते थे।
कैसे होती है तस्करी
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व, जो लगभग 1842 वर्ग किलोमीटर में फैला है, छत्तीसगढ़ के मैकाल पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। यहां साल, बांस, सागौन और अन्य बहुमूल्य वनस्पतियों की प्रचुरता है। ये जंगल न केवल जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं बल्कि कई वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी हैं। लेकिन इन्हीं घने जंगलों में लंबे समय से सागौन की अवैध कटाई का नेटवर्क सक्रिय था। सूत्रों के अनुसार, तस्करों का गिरोह दक्षिण उदंती के जंगलों में रात के अंधेरे में सागौन के पेड़ काटता था। इसके बाद वे लकड़ियों के चार-चार लट्ठों को रस्सी से बांधकर उदंती नदी के बहाव में उतार देते थे। नदी का तेज प्रवाह इन लकड़ियों को छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पार कर नुआपड़ा जिले तक पहुंचा देता था, जहां तस्करों के दूसरे साथी तैयार रहते थे। वे लकड़ी को किनारे से निकालकर बिक्री के लिए आगे भेजते, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान होता और जंगलों का संतुलन भी बिगड़ता।
वन विभाग की कार्रवाई, बड़ी मात्रा में सागौन जब्त
इस तस्करी की भनक लगते ही वन विभाग ने सतर्कता बढ़ाई और हाल ही में एक छापेमारी में बड़ी मात्रा में सागौन की लकड़ी जब्त की गई। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि तस्करी का यह नेटवर्क संगठित और तकनीकी रूप से दक्ष है, जो नदी के प्राकृतिक बहाव को माध्यम बनाकर वन अपराध को अंजाम दे रहा था।
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