रायपुर : छत्तीसगढ़ में आज पौष पूर्णिमा को लोक आस्था का पर्व छेरछेरा बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। बच्चे और बच्चियां सुबह से ही टोली बनाकर लोगों के घरों में पहुंचकर छेरछेरा गीत गा रहे हैं। दान मांग रहे हैं। इस मौके पर प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक पर्व छेरछेरा की बधाई और शुभकामनाएं दी है। प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की है।
नई फसल आने पर मनाया जाता है यह त्यौहार
छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्योहार छेरछेरा पुन्नी आज, गांव के छोटे-छोटे बच्चे टोली बनाकर घर-घर जाकर अन्न का दान मांगते हैं और कहते हैं, "छेरिक छेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला गौटनिन हेरहेरा" "
अरण दरण कोदो दरण जभे देबे तभे टरन" कहते हुए गांव की गलियों में घूमते हैं और माताएं बड़ी श्रद्धा के साथ उन्हें अपने घर में रखें खाने के लिए बचाए हुए धान में से एक-एक मुट्ठी धान दान करते हैं। मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह पर्व पौष मास के पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भी भिक्षा मांगा था । इसलिए भी छेरछेरा मनाया जाता है।
मुख्यमंत्री साय ने दी त्यौहार की बधाई
सीएम साय ने कहा कि महादान और फसल उत्सव के रूप में मनाया जाने वाला छेरछेरा त्योहार हमारी सामाजिक समरसता, दानशीलता की और समृद्ध गौरवशाली परम्परा का संवाहक है। इसी दिन मां शाकम्भरी जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी इसलिए लोग धान के साथ साग-भाजी, फल का दान भी करते हैं।
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