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सुकमा जिले में धान की फसलों में फैल रही बीमारी, पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप, जानें- फसल को बचाने के उपाय

23 अग, 20240 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सुकमा जिले में धान की फसलों में फैल रही बीमारी, पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप, जानें- फसल को बचाने के उपाय

सुकमा जिले में धान की फसलों में फैल रही बीमारी, पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप, जानें- फसल को बचाने के उपाय

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

रायपुर। प्रदेश के सुकमा जिले में धान की फसलों में बीमारी फैल रही है। फसलों में पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप दिख रहा है। ऐसे में कीटनाशक का छिड़काव जरूरी है।

   

सरकार के कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से खेती-किसानी में होने वाले बीमारियों को जिलावार चिन्हाकित कर कीटनाशक छिड़काव के बारे में किसानों को जानकारी दी जा रही है। इसी कड़ी में सुकमा जिले के विभिन्न गांवों में धान के खेतों मे पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप दिखाई दिया है, इसे पत्ती लपेटक या चितरी या सोरटी कहा जाता है। इसके उपचार के लिए कीटनाशक छिड़काव की विधि और तरीके बताए गए हैं।

    

कृषि विज्ञान केंद्र, सुकमा के कृषि वैज्ञानिकों ने जिले के मुरतोणडा, पेरमापारा, नीलावरम, तोगपाल, सोनाकुकानार, नयानार, रामपुरम का मैदानी भ्रमण के दौरान धान के खेत में पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप पाया है। इस कीट की इल्ली अवस्था फसल को नुकसान पहुंचाती है। इस कीट की इल्ली अपने लार द्वारा पत्ती की नोंक को या पत्तियों के दोनों सिरों को चिपका लेती है।  इस तरह इल्ली इसके अंदर रहकर पत्तियों के हरे भाग (क्लोरोफिल) को खुरच कर खा जाती है जिसके कारण पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देती है, जिसकी वजह से पत्तियों में भोजन बनाने  की प्रकिया नहीं हो पाती है। 


कीट लगने से पत्तियां मुरझा जाती हैं

कीट लगने पर पत्तियां बाद में सूखकर मुरझा जाती हैं। फसल की वृद्धि भी रुक जाती है। इसके नियंत्रण और उपचार के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने प्रभावी उपाय अपनाने के लिए किसानों को सलाह दी है। 


कीटनाशक का स्प्रे कराएं

कृषि वैज्ञनिकों ने बताया कि बारिश रुकने व मौसम खुला होने पर कोई एक कीटनाशक का स्प्रे कराएं। क्लोरोपायरीफास 20 ईसी 1250 मिली प्रति हेक्टेयर या कर्टाफ हाइड्रोक्लोराइड 50 रू एसपी 1000 ग्राम प्रति हेक्टेयर या क्लोरेटानिलिप्रोएल 18.5 एससी.150 ग्राम प्रति हेक्टेयर या इंडोक्साकार्ब 15.80 प्रतिशत ईसी 200 मिली प्रति हेक्टेयर का उपयोग करके प्रभावी नियंत्रण कर सकते हैं, ठीक न होने पर 15 दिन बाद दूसरे कीटनाशक का छिडकाव करें और अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करके ही रासायनिक दवाइयों का उपयोग करें।


फसल को बचाने के लिए इन बातों का भी ध्यान रखना जरूरी

- खेतों एवं मेड़ों को खरपतवार मुक्त रखें। 

- संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों का उपयोग करें।

- खेतों मे चिड़ियों के बैठने के लिए टी आकार की पक्षी मीनार लगाए। 

- रात्रि चर कीट को पकड़ने के लिए प्रकाश प्रंपच या लाइट ट्रैप खेतो में लगाए। 

- अंडे या इल्ली दिखाई देने पर उसे इकट्ठा करके नष्ट करें।

-  कीट से प्रभावित खेतों में रस्सी चलाएं।

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