
रायपुर। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर गुरुवार को छत्तीसगढ़ बुनकर समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से उनके निवास कार्यालय पर मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का स्वागत किया और उन्हें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा कला हमारी समृद्ध विरासत है। यह प्रदेश को एक विशिष्ट पहचान दिलाती है और हमारी सांस्कृतिक अस्मिता को सशक्त बनाती है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का बुनकर समाज अपने श्रम, कौशल और रचनात्मकता के माध्यम से राज्य का गौरव बढ़ा रहा है। राज्य सरकार बुनकरों की समृद्धि, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए बहुआयामी प्रयास कर रही है। कच्चा माल सुलभ कराने से लेकर लागत कम करने और विपणन की बेहतर सुविधाएं प्रदान करने तक, हर मोर्चे पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। बुनकरों की आत्मनिर्भरता ही उनकी रचनात्मक उड़ान को नई ऊँचाई दे सकती है।
समाज के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बुनकरों की ओर से निर्मित करघा की प्रतिकृति भेंट की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपकी यह भेंट न केवल आपके सम्मान और भावनाओं का प्रतीक है, बल्कि सृजन, परंपरा और हमारे प्रदेश के सांस्कृतिक मूल्यों का भी प्रतीक है। बुनकर समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेश देवांगन, पुरुषोत्तम देवांगन, धनेश देवांगन, गजेंद्र देवांगन उपस्थित थे।
यह समय हमारे पारंपरिक उत्पादों और हुनर को प्रोत्साहन देने का है
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय हमारे पारंपरिक उत्पादों और हुनर को प्रोत्साहन देने का है। हथकरघा उद्योग केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है, जिसे बुनकर समाज आज भी सहेजे हुए है। उन्होंने प्रधानमंत्री की ओर से चलाए गए 'वोकल फॉर लोकल अभियान' का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार बुनकर समाज के हर संभव सहयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनके सर्वांगीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। आने वाला समय बुनकरों के सम्मान, समृद्धि और सशक्तिकरण का होगा।
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