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जल है तो कल है” — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आह्वान, बोले – जल संरक्षण को बनाएं जन आंदोलन

10 अक्टू, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
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Sandeep Sinha
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinha

रिपोर्ट - प्रशांत द्विवेदी

रायपुर। राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में ‘सुजलाम भारत’ के अंतर्गत जल संरक्षण एवं जल संवर्धन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए उन्होने कहा, “जल है तो कल है, और जल से ही कल संवरेगा। जल संरक्षण के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा, तभी हम अपने भविष्य को सुरक्षित रख पाएंगे।”

मुख्यमंत्री ने किया जल कलश पर जल अर्पण

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने जल कलश पर जल अर्पित कर जल संचयन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जल ही जीवन है” और हमारी नदियाँ धरती को सींचकर जीवनदायिनी बनाती हैं। मुख्यमंत्री ने केलो नदी का पवित्र जल पृथ्वी प्रतीक कलश में अर्पित कर धरती को सिंचित करने का संदेश दिया।

प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में जल संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई अवसरों पर जल संकट पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के प्रति जनमानस में जागरूकता की कमी इस संकट को और बढ़ा सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में लोग अपने-अपने स्तर पर जल संचयन के लिए प्रयास कर रहे हैं और ऐसे मंच अनुभव साझा करने के लिए उपयोगी हैं, जो भविष्य की नीति निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे। 
 
राजनांदगांव की महिला सरपंच बनी प्रेरणा
 
मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में एक प्रेरक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि राजनांदगांव जिले की एक महिला सरपंच ने स्वप्रेरणा से सूख चुके हैंडपंपों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। केंद्र सरकार ने उनके इस अभिनव प्रयास की सराहना की और वित्तीय सहायता भी प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे उदाहरण समाज को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं।

छत्तीसगढ़ की नदियां हैं प्रदेश की जीवनरेखा

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नदियां महानदी, इंद्रावती, शिवनाथ, केलो और अन्य प्रदेश की जीवनरेखा हैं। उन्होंने कहा कि ये नदियां न केवल धरती को उर्वर बनाती हैं, बल्कि कृषि, उद्योग और जीवन के हर क्षेत्र को संजीवनी प्रदान करती हैं। उन्होंने आह्वान किया कि जल की हर बूंद का सम्मान किया जाए और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजकर रखा जाए।
 
साढ़े तीन लाख जल संरचनाएं बनीं, भू-जल स्तर में सुधार

जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने बताया कि प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम की संकल्पना की गई है। उन्होंने कहा कि अब तक प्रदेश में साढ़े तीन लाख जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिससे भू-जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कार्यक्रम में लगभग 300 से अधिक प्रतिभागियों ने जल संरक्षण के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित

इस अवसर पर पद्मश्री श्रीमती फूलबासन बाई यादव, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस.,लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक उपस्थित रहे।
 
मुख्यमंत्री का संकल्प
 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा —
“हम सभी को मिलकर जल संरक्षण को एक जन आंदोलन का स्वरूप देना होगा, ताकि हमारा भविष्य सुरक्षित रह सके। छत्तीसगढ़ की धरती सदैव हरियाली और समृद्धि से लहलहाती रहे — यही हमारा संकल्प है।”

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