
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinhaरिपोर्ट - मनमोहन नेताम
गरियाबंद | मैनपुर ग्राम पंचायत के सचिव द्वारा जारी एक आदेश ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पंचायत सचिव ने सहकारी समिति को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि जब तक हितग्राही नल-जल, प्रकाश कर, संपत्ति कर, व्यवसायिक कर जैसे पंचायत टैक्स नहीं भरते, तब तक उन्हें शासकीय राशन न दिया जाए। इस फरमान के बाद जैसे ही राशन लेने ग्रामीण सहकारी सोसाइटी पहुंचे और उन्हें राशन से वंचित किया गया, पूरे नगर में भारी विरोध शुरू हो गया। मामला तेजी से वायरल हो रहा है और चौक-चौराहों पर इसकी चर्चा जोरों पर है।
नाराज लोगों की मांग, पहले सुविधा दो, फिर टैक्स लो
मैनपुर नगरवासियों का आरोप है कि बीते 8-10 वर्षों से नगर में स्ट्रीट लाइट बंद हैं, गलियों और तालाबों तक कचरे के ढेर लगे हैं, साफ-सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। लोगों का कहना है कि जब सुविधाएं ही नहीं मिल रही, तो फिर टैक्स वसूली कैसी
लोगों ने कहा –"हम टैक्स देने से पीछे नहीं हटते, लेकिन त्योहार के समय राशन रोकना अमानवीय है। पहले सुविधाएं दो, फिर नियम के तहत टैक्स लो।"
राशन रोकना अवैधानिक-CEO
जनपद पंचायत मैनपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्वेता वर्मा ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ग्राम पंचायत को किसी भी हितग्राही का राशन रोकने का अधिकार नहीं है। यह खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उल्लंघन है। शिकायत मिलते ही जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई होगी।
ग्राम पंचायत सचिव ने क्या कहा?
ग्राम पंचायत मैनपुर खुर्द के सचिव संजय नंदलाल ने अपने बचाव में कहा कि यह आदेश पंचायत प्रतिनिधियों और सरपंच के निर्देश पर जारी किया गया था। उन पर टैक्स वसूली का दबाव था।
दीपावली से पहले बढ़ी परेशानी, गरीबों पर पड़ा सीधा असर
इस फरमान से सबसे ज्यादा असर गरीब परिवारों पर पड़ा है, जो सरकारी राशन पर निर्भर हैं। दीपावली जैसे बड़े त्योहार के पहले राशन रोके जाने से उनका त्योहारी उल्लास फीका पड़ गया है। कई बुजुर्ग हितग्राहियों ने कहा कि वे मेहनत-मजदूरी कर जैसे-तैसे पेट पालते हैं, अब टैक्स का दबाव और राशन से वंचित करना अमानवीय कदम है।
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