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Chhattisgarh

एमपी आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण, यहां की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक चेतना भी प्रेरणादायक : लक्ष्मी राजवाड़े

29 जुल, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
Minister lakshami rajwade

Minister lakshami rajwade

Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रायपुर। प्रदेश की महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े मध्यप्रदेश के दो दिवसीय प्रवास में रहीं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की भूमि न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है बल्कि यहां की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक चेतना भी प्रेरणादायक है। इस प्रवास ने उन्हें नई ऊर्जा दी है।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने एमपी प्रवास के पहले दिन खंडवा जिले में नर्मदा तट पर स्थित ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर महादेव के मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेश की जनता के कल्याण, सुख-समृद्धि और सामाजिक सौहार्द की कामना के साथ नर्मदा पूजन भी किया। इसके बाद वह महेश्वर मंदिर (जिला-खरगौन) पहुंचीं। उन्होंने महेश्वर घाट और मंदिर परिसर का भी दर्शन किया।

 

प्रवास के दूसरे दिन मंत्री उज्जैन पहुंचीं। वह महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में शामिल हुई। साथ ही कालभैरव मंदिर के दर्शन कर उन्होंने छत्तीसगढ़ की सुरक्षा और समृद्धि की प्रार्थना की। धार्मिक स्थलों के दर्शन के बाद मंत्री ने इंदौर के ऐतिहासिक देवी अहिल्याबाई होल्कर महल का भ्रमण किया। 

 

आज की महिलाएं भी समाज में नेतृत्व की भूमिका निभा रही

अहिल्याबाई होल्कर महल में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने मराठा कालीन स्थापत्य कला, अहिल्याबाई की जीवन गाथा और प्रशासनिक कुशलता से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कीं। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई जैसी महिलाओं से प्रेरणा लेकर आज की महिलाएं भी समाज में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने इस धरोहर को महिलाओं की सामाजिक-राजनीतिक सशक्तिकरण की ऐतिहासिक मिसाल बताया।

 

स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम में हुईं शामिल 

मंत्री राजवाड़े इंदौर प्रवास के दौरान दृष्टिबाधित बच्चों के लिए आयोजित रोजगार मूलक स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों के आत्मविश्वास, हुनर और जिजीविषा की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। मंत्री ने प्रशिक्षकों और सामाजिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक और समावेशी बनाएं, जिससे दिव्यांग बच्चों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिल सकें।




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