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पद्मश्री उमा शंकर पांडे बोले- पानी को बनाया नहीं जा सकता, बचाया जा सकता है

29 नव, 20240 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
पद्मश्री उमा शंकर पांडे बोले- पानी को बनाया नहीं जा सकता, बचाया जा सकता है

पद्मश्री उमा शंकर पांडे बोले- पानी को बनाया नहीं जा सकता, बचाया जा सकता है

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र की ओर से नवा रायपुर अटल नगर स्थित अरण्य भवन में ”सतत आवास और कृषि क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना  के क्रियान्वयन” पर शुक्रवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें पद्मश्री उमा शंकर पांडे ने जल संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि - पानी को बनाया नहीं जा सकता, बचाया जा सकता है। 

   

पद्मश्री उमाशंकर ने कहा कि जल संकट आज विश्व की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए संग्रहालय और विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही सुझाव दिया कि छात्रों को पानी बचाने के उपायों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाए और ”पानी की पाठशाला” जैसी पहल शुरू की जाए, जिससे जल के महत्व और उसके संरक्षण की तकनीकों को लोगों तक पहुंचाया जा सके।

     

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी पद्धतियां अपनाई जानी चाहिए, जिनसे घर का पानी घर में, गांव का पानी गांव में और जंगल का पानी जंगल में ही संरक्षित रहे। उन्होंने नया रायपुर में मौजूद जल संरचनाओं और जलाशयों की सराहना की। इसके अलावा, उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की प्रशंसा की और नदियों को स्वच्छ रखने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।

   

इस अवसर पर एयर कंडीशनर तापमान विनियमन पर पोस्टर और जलवायु परिवर्तन से संबंधित 100 सफलता कहानियों पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन किया गया।


जनता के बीच जागरूकता फैलाने पर जोर दिया

प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या को कम करने के लिए समुदाय की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस दिशा में ”प्लास्टिक का उपयोग न करने” और आम जनता के बीच जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी), हरित भवन (ग्रीन बिल्डिंग), और हरित इस्पात (ग्रीन स्टील) जैसे नवाचारी उपायों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। 


इन्होंने भी विचार व्यक्त किए

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे, आबकारी विभाग की सचिव एवं आयुक्त आर. संगीता, आईआईटी मुंबई के क्लाइमेट स्टडीज विभाग के प्रोफेसर डॉ. रघु मर्तुगुडे, तमिलनाडु WTC के पूर्व निदेशक डॉ. पन्नीरसेल्वम, रायपुर नगर निगम आयुक्त अविनाश मिश्रा, बेंगलुरु के वास्तुकार डॉ. सुजीत कुमार, अंबिकापुर नगर निगम के स्वच्छ भारत मिशन के नोडल अधिकारी रितेश सैनी और नर्मदा नैचुरल फार्म्स के संस्थापक संकल्प शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। इन विशेषज्ञों ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपने विचार और अनुभव साझा किए।

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