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गुणवत्ता और मानक ही आत्मनिर्भर भारत की पहचान, मुख्यमंत्री ने दिलाई शपथ, कहा- पारदर्शिता, उपभोक्ता अधिकार और नवाचार सर्वोपरि

14 अक्टू, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
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Sandeep Sinha
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinha

रिपोर्ट -  प्रशांत द्विवेदी

रायपुर। विश्व मानक दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित "मानक महोत्सव" में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि गुणवत्ता और मानक ही आत्मनिर्भर भारत की असली पहचान हैं। उन्होंने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में मानकों का पालन आवश्यक है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है, उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा होती है और नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है।  मुख्यमंत्री ने भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की सराहना करते हुए कहा कि संस्था देशभर में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि बीआईएस के मानक चिन्ह अब उपभोक्ता विश्वास का प्रतीक बन चुके हैं और मिलावट तथा नकली उत्पादों पर लगाम लगाने में प्रभावी साबित हुए हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनों को "गुणवत्ता शपथ" दिलाई और सभी से आग्रह किया कि वे मानकीकृत उत्पादों को अपनाएं और "विकसित भारत" के निर्माण में भागीदार बनें।

गुणवत्ता का संदेश, नवाचार का सम्मान

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में मानकीकरण के क्षेत्र में योगदान देने वाले संस्थानों, मानक क्लबों और मेंटर्स का सम्मान किया। उन्होंने कहा, जब हर नागरिक गुणवत्ता को अपना धर्म समझेगा, तभी सच्चे अर्थों में विकसित भारत का सपना साकार होगा। कार्यक्रम में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि गुणवत्ता अब केवल नीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का संकल्प बन चुकी है। उन्होंने “जागो ग्राहक जागो” संदेश को उपभोक्ता सशक्तिकरण का आधार बताया।

बीआईएस के प्रयासों की सराहना, उपभोक्ताओं के लिए बीआईएस केयर ऐप उपयोगी

बीआईएस रायपुर के निदेशक एस. के. गुप्ता ने बताया कि अब तक 22,000 से अधिक उत्पादों को मानक चिन्ह प्रदान किए जा चुके हैं। उन्होंने बीआईएस केयर ऐप की जानकारी दी, जिसके माध्यम से उपभोक्ता आईएसआई, हॉलमार्क और एचयूआईडी युक्त उत्पादों की प्रमाणिकता जांच सकते हैं और शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने इस पहल को "उपभोक्ता सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम" बताया।

* नवाचार आधारित स्टॉल बने आकर्षण का केंद्र

* महोत्सव में शैक्षणिक संस्थानों के नवाचारी स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

* बिरकोनी स्कूल के छात्रों ने रक्तचाप और मिट्टी की नमी जांचने की मशीन प्रस्तुत की।

* पं. आर. डी. तिवारी इंग्लिश मीडियम स्कूल के छात्रों ने “एक्सप्लोरर रोबोट” दिखाया जो अंधेरे और दुर्गम क्षेत्रों में काम करने में सक्षम है।

* अंडा स्कूल के विद्यार्थियों ने दिव्यांगजनों के लिए स्मार्ट ट्रेन मॉडल तैयार किया।

मुख्यमंत्री ने इन नवाचारों की सराहना करते हुए कहा, जब युवाओं की सोच में गुणवत्ता और नवाचार जुड़ते हैं, तभी भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर बढ़ता है।

स्टालों का अवलोकन और उद्योग-शिक्षा समन्वय की सराहना

मुख्यमंत्री साय ने सिपेट रायपुर, बीआईएस, और अन्य संस्थानों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने सिपेट की पहल की सराहना करते हुए इसे उद्योग-शिक्षा समन्वय का आदर्श उदाहरण बताया।

मानक केवल नियम नहीं, राष्ट्र निर्माण की रीढ़ हैं — मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्ता केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू का संस्कार बनना चाहिए। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे “क्वालिटी को क्वांटिटी से पहले रखें” और छत्तीसगढ़ को मानकीकरण, नवाचार और पारदर्शिता में देश का अग्रणी राज्य बनाएं।

विशेष अतिथि और गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस अवसर पर एनआईटी रायपुर के निदेशक एन. वी. रमन्ना राव, चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सतीश थोरानी, इस्पात प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक ए. के. चक्रवर्ती, कैट के अध्यक्ष परमानंद जैन, स्टील रिरोलर्स संघ के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी और ज्वेलर्स संघ के अध्यक्ष श्री कमल सोनी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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