
रायपुर। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से वार्ता के बाद बुधवार को राजस्व अधिकारियों की हड़ताल समाप्त हो गई। वार्ता के दौरान मंत्री ने राजस्व अधिकारियों की मांगों को पूरा करने के लिए ठोस आश्वासन दिया। आश्वासन से संतुष्ट राजस्व संघ के पदाधिकारियों ने हड़ताल समाप्त किए जाने की घोषणा की।
राजस्व संघ के बैनर तले 'संसाधन नहीं, तो काम नहीं' सिद्धांत पर आधारित 17 सूत्रीय मांगों को पूरा करने के राजस्व अधिकारी 28 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन कर रहे थे। बुधवार को राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के साथ उनके निवास कार्यालय में राजस्व संघ के पदाधिकारियों की बैठक हुई। मंत्री की के सकारात्मक पहल और आश्वासन से संतुष्ट संघ के पदाधिकारी ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा की।
इस अवसर पर राजस्व संघ के प्रांताध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे,कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष विक्रांत सिंह राठौर,प्रदेश सचिव प्रशांत पटेल, प्रदेश प्रवक्ता शशिभूषण सोनी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
राजस्व विभाग शासन की रीढ़ है
राजस्व मंत्री ने कहा, राजस्व विभाग शासन की रीढ़ है। इसके अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी समस्याओं को शासन गम्भीरता से लेता है और उचित समाधान के लिए कटिबद्ध है। इस अवसर पर राजस्व सचिव, राजस्व संचालनालय के संचालक और उप सचिव भी उपस्थित रहे।
मांगे, जिन्हें पूरा करने का दिया शासन
डिप्टी कलेक्टर के पदों पर पदोन्नति व सीधी भर्ती पर 50ः50 अनुपात की बहाली पर कार्यवाही की जाएगी। राजस्व अधिकारियों को राजपत्रित दर्जा दिए जाने की मांग पर नायब तहसीलदार और तहसीलदार को राजपत्रित करने संबंधी प्रस्ताव पर शासन ने त्वरित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। लंबित पदोन्नति प्रकरणों का निराकरण करते हुए नायब तहसीलदारों एवं तहसीलदारों के लंबित ग्रेड पे और पदोन्नति मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाएगा। इसी तरह सभी तहसीलों में कार्यरत अधिकारियों को प्रोटोकॉल एवं लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी हेतु शासकीय वाहन व चालक की सुविधा उपलब्ध कराए जाने का आश्वासन मिला है। राजस्व विभाग में बिना वैध प्रक्रिया के निलंबन अथवा अभियोजन से प्रभावित अधिकारियों की स्थिति की 15 दिवस के भीतर जांच कर बहाली की कार्रवाई की जाएगी।
कार्यालयों में कामकाज हुआ सामान्य
हड़ताल के समापन के बाद राजस्व कार्यालयों में कामकाज फिर से सामान्य हो गया। इससे आम जनता को राहत मिली है। संघ ने शासन की तत्परता और समाधानात्मक रुख की सराहना करते हुए भरोसा जताया कि लंबित विषयों पर आगे भी संवेदनशील निर्णय लिए जाएंगे। यह वार्ता संवाद और समन्वय के माध्यम से प्रशासनिक समस्याओं के समाधान का सफल उदाहरण बनी है।
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