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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की स्थापना के रजत जयंती समारोह में बोले राज्यपाल- न्याय का प्रहरी बनकर खड़ा है न्यायालय, सीएम साय ने कहा- बिलासपुर को दी एक नई पहचान

27 सित, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
silver jubilee celebrations of the establishment of the Chhattisgarh High Court

silver jubilee celebrations of the establishment of the Chhattisgarh High Court

Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की स्थापना का रजत जयंती समारोह शनिवार को मनाया गया। मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि राज्य के जन्म के साथ ही हाईकोर्ट की बिलासपुर में स्थापना हुई। तभी से यह न्यायालय संविधान का व्याख्याकार, नागरिक अधिकारों का संरक्षक और न्याय का प्रहरी बनकर खड़ा है। विशिष्ट अतिथि सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बिलासपुर को एक नई पहचान दी। 

राज्यपाल ने लोक अदालत के अंतर्गत लंबित मामलों के हो रहे तत्काल निराकरण के लिए न्यायपालिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि न्याय केवल सामर्थ्यवान लोगों के लिए ही उपलब्ध नहीं हो बल्कि गांव गरीब एवं आमजनों के लिए भी सर्व सुलभ न्याय उपलब्ध हो तभी इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका की भूमिका सार्थक बनेगी। हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को पौधा व स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत किया। 

 

उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, विधि मंत्री गजेंद्र यादव, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस भी इस अवसर पर  मौजूद रहे। कार्यक्रम में रजत जयंती समारोह पर केंद्रित स्मारिका का विमोचन भी किया। 

 

समय पर न्याय उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की उपलब्धता के साथ ही हम किसी भी हालत में समय पर न्याय उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध हैं। इसी कड़ी में वर्ष 2023-24 की तुलना में विधि एवं विधायी विभाग के बजट में पिछले साल 25 प्रतिशत और इस वर्ष 29 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि यह पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि इस पीठ के न्यायाधीश जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस नवीन सिन्हा, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस भूपेश गुप्ता और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा जैसे न्यायाधीश देश की सर्वाेच्च अदालत तक पहुंचे। न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्चुअल कोर्ट और लाइव स्ट्रीमिंग जैसे डिजिटल नवाचारों को बढ़ावा दिया है। साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड रूम, आधार आधारित सर्च और न्यायिक प्रशिक्षण के नए माड्यूल भी अपनाये जा रहे हैं। 

 

हमारा सच्चा कर्म और विचार ही धर्म है: न्यायाधीश जेके माहेश्वरी

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जेके माहेश्वरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यह धान्य पूर्णता की ओर ली जाती है। जहां धर्म है वहां विजय है। हमारा सच्चा कर्म और विचार ही धर्म है। चेतना ही सहज धर्म से जोड़ती है। अगले 25 साल में हम न्यायपालिका को कहां रखना चाहते हैं इस पर विचार और योजना बनाने का समय है। आम आदमी कोर्ट के दरवाजे पर एक विश्वास के साथ आता है उस मूल भावना के साथ कार्य करें। उन्होंने न्याय व्यवस्था से जुड़े बेंच, बार और लॉयर को विजन के साथ आगे बढ़ने प्रेरित किया। 

 

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 25 वर्षों में किए अभूतपूर्व कार्य 

केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने कहा कि आज केवल न्यायपालिका के 25 वर्षों की यात्रा का ही उत्सव नहीं है बल्कि न्यायपालिका की उस सुदृढ़ परंपरा का सम्मान है जिसने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा में अपना निरंतर योगदान दिया है। पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्याय की पहुंच को आम जनता तक सरल बनाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और तकनीकी को क्रांति की तरह अपनाने में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। 

 

न्यायालय ने विधि के शासन को स्थापित करने के लिए किया है बेहतर कार्य : मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा 

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का रजत जयंती कार्यक्रम निश्चित रूप से हम सभी के लिए गौरवशाली क्षण है। पिछले 25 वर्षों में न्यायालय ने विधि के शासन को स्थापित करने बेहतर कार्य किया है। उन्होंने न्यायालय की स्थापना से लेकर अब तक उपलब्धि एवं कामकाज में आए सकरात्मक बदलाव से सभा को अवगत कराया। न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया। 

 

समारोह में इनकी रही मौजूदगी 

उप मुख्यमंत्री अरूण साव, विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, विधि विधायी मंत्री गजेन्द्र यादव, मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव, तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी. सैम कोसी, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यतीन्द्र सिंह, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, डीजीपी अरूणदेव गौतम, महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत, विधायक धरमलाल कौशिक, अमर अग्रवाल, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष सहित अन्य न्यायाधीश, अधिवक्ता, जन प्रतिनिधिगण तथा न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी उपस्थित थे।     

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