
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinhaरिपोर्ट - प्रशांत द्विवेदी
रायपुर। राजधानी के न्यू सर्किट हाउस में आज जनजातीय गौरव दिवस को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस वर्ष जनजातीय गौरव दिवस को भव्य, ऐतिहासिक और जन-सामान्य को जोड़ने वाले उत्सव के रूप में मनाने की राज्य सरकार ने विस्तृत योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जशपुर में आयोजित कार्यक्रम को अपार सफलता मिली थी और उसकी सराहना स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की थी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती (15 नवंबर) को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी, जिससे देशभर में जनजातीय समाज के योगदान को सम्मान और नई पहचान मिली। मुख्यमंत्री साय ने कहा, "हमारे जनजातीय समाज की वीरगाथाओं और गौरवशाली इतिहास को इतिहास के पन्नों में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया। राज्य सरकार का प्रयास है कि इन महान जननायकों के योगदान को हर व्यक्ति तक पहुंचाया जाए।”
भगवान बिरसा मुंडा का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा
भगवान बिरसा मुंडा को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने मात्र 25 वर्ष की आयु में अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। “उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित कर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की अलख जगाई थी। उनका जीवन आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस वर्ष जनजातीय गौरव दिवस के मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रपति 16 नवंबर तक विदेश दौरे पर हैं, इसलिए कार्यक्रम की तारीख को 1-2 दिन आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है ताकि वे स्वयं इस ऐतिहासिक आयोजन में सम्मिलित हो सकें।
राज्यभर में मनाया जाएगा जनजातीय गौरव और विरासत का उत्सव
कार्यशाला में जनजातीय विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, और विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस दौरान जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने हेतु कई रचनात्मक सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।
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