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Chhattisgarh

बेमौसम बारिश से किसानों की टूटी कमर, खेतों में सड़ रही धान की फसल, मेहनत पर फिरा पानी

31 अक्टू, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
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Sandeep Sinha
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinha

रिपोर्ट -  मनोज श्रीवास्तव

एमसीबी। बेमौसम बारिश ने किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में कटकर रखी धान की फसल अब सड़ने की कगार पर है। भरतपुर, चिरहाटोला और बेला जैसे गांवों में हालात बेहद गंभीर हैं। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है, जिससे फसल कटाई मुश्किल हो गई है और किसानों की सालभर की मेहनत बर्बाद होती नजर आ रही है।
 
“पूरा साल की मेहनत बर्बाद हो गई”

भरतपुर गांव के किसान राम प्रसाद बताते हैं, “हमारे खेतों में पानी लबालब भर गया है। 5 एकड़ में लगाई पूरी फसल बर्बाद हो गई है। अब कुछ भी नहीं बचा।”बेला गांव के किसान कमलेश का कहना है, “धान की जड़ें सड़ गई हैं, अब तो अंकुरण आने लगा है। पूरी फसल खराब हो गई है।” वहीं चिरहाटोला के किसान संखपाल सिंह बताते हैं कि खेतों में पानी जमा होने से फसल कटाई नामुमकिन हो गई है। “फसल पककर तैयार है, लेकिन खेत में पानी भरा है। काट भी नहीं पा रहे, पूरी फसल बर्बाद हो रही है।” महिला किसान राजकुमारी की भी यही कहानी है। “धान कटकर रखी थी, लेकिन बारिश ने सब भिगो दिया। 80 से 90 हजार का नुकसान हो गया है।”
 
धान खरीदी लक्ष्य पर भी संकट के बादल

जिले में खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी का लक्ष्य 11 लाख 37 हजार क्विंटल रखा गया है। लेकिन लगातार बारिश और फसलों के नुकसान ने इस लक्ष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खेती का रकबा घटा, उम्मीदें भी टूटीं

कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार धान का रकबा घटकर 32 हजार 920 हेक्टेयर रह गया है, हालांकि दलहन और तिलहन की खेती में कुछ बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सरकारी मदद की आस में किसान

बेमौसम बारिश ने जिले के किसानों की उम्मीदों को झटका दिया है। खेतों में सड़ रही फसलें उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डाल रही हैं। अब किसान सरकार और प्रशासन से मदद की आस लगाए बैठे हैं ताकि उनकी मेहनत पूरी तरह व्यर्थ न जाए।
 

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