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Chhattisgarh

जहां कभी नक्सलियों की ट्रेनिंग होती थी, आज वहां वन विभाग युवाओं को वानिकी कार्यों में प्रशिक्षित कर दे रहा स्व-रोजगार

05 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
forestry work at Forest of bastar

forestry work at Forest of bastar

Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रायपुर। सरकार की मंशा के अनुरूप बस्तर का माहौल बदलने लगा है। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर जिले के सुदूर गांव चांदामेटा, मुण्डागढ़, छिन्दगुर और तुलसी डोंगरी, जो कि पहले नक्सल गतिविधियों के गढ़ माने जाते थे और जहां कभी नक्सलियों की ट्रेनिंग हुआ करती थी, अब वहां का नजारा अलग है। वन विभाग स्थानीय युवाओं को वानिकी कार्यों का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्व-रोजगार उपलब्ध करा रहा है।

वन मंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता का कहना है कि संबंधित गांवों के लोग भटकने के बजाय अब विकास में सहभागी के लिए तैयार हैं। वन विभाग के अधिकारियों की ओर से लगातार संवाद, जागरूकता और विश्वास निर्माण के प्रयासों से ग्रामीणों का नजरिया बदला है। वानिकी कार्यों में स्थानीय लोगों को घर के पास ही रोजगार उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा रहा है और सामाजिक रूप से भी वे सशक्त हो रहे हैं।

 

20 लाख रुपये का तत्काल रोजगार मिला

 मुण्डागढ़ के आसपास स्थित बांस वनों में इस वर्ष वैज्ञानिक तरीके से वन-उपचार किया गया। इस काम में ग्रामीणों को लगभग 20 लाख रुपये का तत्काल रोजगार मिला, जो सीधे उनके बैंक खातों में जमा होगा। अगले तीन वर्षों में लगभग एक करोड़ 37 लाख रुपये के अतिरिक्त रोजगार की संभावना है। इस क्षेत्र से प्राप्त 566 नोशनल टन बांस के उत्पादन का पूरा लाभ वन प्रबंधन समिति के माध्यम से ग्रामीण विकास में ही खर्च किया जाएगा।

 

बीमार, पुराने और मृत वृक्षों को हटाकर जंगल का उपचार किया जा रहा

छिन्दगुर और चांदामेटा के पहाड़ी क्षेत्रों में प्रवरण सह सुधार कार्य के तहत बीमार, पुराने और मृत वृक्षों को हटाकर जंगल का उपचार किया जा रहा है, इससे ग्रामीणों को 32 लाख रुपये का तत्काल रोजगार मिल रहा है। काष्ठ उत्पादन से प्राप्त आय का 20 प्रतिशत भी गांव की समिति को मिलेगा। अगले छह वर्षों में लगभग 43 लाख रुपये का अतिरिक्त रोजगार इसी उपचार कार्य से मिलेगा। वन विभाग ग्रामीणों की जरूरतों का भी ध्यान रख कर ठंड से बचाव के लिए कंबल वितरण तथा समिति सदस्यों को टी-शर्ट उपलब्ध कराने जैसी आवश्यकताएं तत्काल पूरी की जा रही हैं।

 

ग्रामीणों को स्थायी आजीविका दी जा रही

वन मंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता का कहना कि जो इलाके पहले भय और हिंसा से पहचाने जाते थे, वे आज शांति, आजीविका और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। वानिकी कार्यों के माध्यम से जल, जंगल और जमीन का संरक्षण करते हुए ग्रामीणों को स्थायी आजीविका दी जा रही है। बस्तर के नक्सल मुक्त गांव यह साबित कर रहे हैं कि जब विश्वास और विकास साथ आते हैं, तब बदलाव होना निश्चित है।



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