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अमेरिका ने ईरान के 5 सेक्टर पर लगाए प्रतिबंध, भारत के तेल और चाबहार कारोबार पर कितना पड़ेगा असर

25 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
अमेरिका ने ईरान के 5 सेक्टर पर लगाए प्रतिबंध, भारत के तेल और चाबहार कारोबार पर कितना पड़ेगा असर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

अमेरिका ने ईरान से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर शिकंजा कसते हुए 5 प्रमुख क्षेत्रों को निशाने पर लिया है। डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग से जुड़े कारोबार पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं।


इस कदम का असर ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों तक पहुंच सकता है। भारत के लिए तेल, चाबहार बंदरगाह, डॉलर में भुगतान और ईरान के साथ व्यापार ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अमेरिकी प्रतिबंधों का प्रभाव पड़ने की आशंका है।


इन 5 क्षेत्रों पर अमेरिका का फोकस

अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की अंतरराष्ट्रीय कमाई और कारोबारी गतिविधियों को सीमित करना है। जिन क्षेत्रों को प्रतिबंधों के दायरे में रखा गया है, उनमें शामिल हैं—

- डिजिटल एसेट्स, जैसे क्रिप्टोकरेंसी

- टेक्नोलॉजी

- सोना

- एविएशन

- शिपिंग


अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान को होने वाली आर्थिक आय और दूसरे देशों के साथ उसके कारोबार पर दबाव बढ़ाना चाहता है।


विदेशी कंपनियों पर भी आ सकता है असर

अमेरिकी नीति का दायरा केवल ईरानी कंपनियों तक सीमित नहीं है। यदि किसी दूसरे देश की कंपनी प्रतिबंधित गतिविधियों के जरिए ईरान के साथ कारोबार करती है, तो उस पर भी अमेरिकी कार्रवाई का खतरा बन सकता है।


अमेरिकी डॉलर और बैंकिंग नेटवर्क इस दबाव का बड़ा माध्यम है। प्रतिबंधों की स्थिति में संबंधित कंपनी के लिए अमेरिकी बैंकों और कंपनियों के साथ कारोबारी संबंध बनाए रखना कठिन हो सकता है।


अमेरिका ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन देशों या कंपनियों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जाएंगे। चीन, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं।


स्कॉट बेसेंट ने ईरान के सामने बताए दो विकल्प

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया है। उनके मुताबिक यह अभियान ईरान और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ है।


बेसेंट ने ईरान के सामने दो संभावित रास्ते बताए। पहला, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़कर केवल गुजारे लायक अर्थव्यवस्था तक सीमित हो जाए। दूसरा, सामान्य आर्थिक स्थिति की तरफ लौटे और वैश्विक अर्थव्यवस्था में दोबारा शामिल होने का अवसर हासिल करे।


सेकेंडरी प्रतिबंध क्यों महत्वपूर्ण हैं?

किसी विदेशी कंपनी के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम इसलिए गंभीर हो सकता है क्योंकि कार्रवाई के बाद अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक उसकी पहुंच प्रभावित हो सकती है।


इसी खतरे के कारण भारतीय, चीनी, तुर्की या UAE की कंपनियां ईरान के साथ कारोबार करते समय अमेरिकी नियमों को ध्यान में रखने के लिए मजबूर हो सकती हैं। अमेरिकी बाजार और बैंकिंग प्रणाली में नुकसान की आशंका कारोबार को प्रभावित कर सकती है।


भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

अमेरिकी कदम से भारत पर सीधे प्रतिबंध लगना तय नहीं है। फिर भी ईरान के साथ भारत के मौजूदा आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के कारण कुछ क्षेत्रों में दबाव बढ़ सकता है।


1. तेल खरीद: ईरान से कच्चा तेल खरीदने की स्थिति में अमेरिकी प्रतिबंध भुगतान और खरीद की प्रक्रिया को मुश्किल बना सकते हैं।


2. चाबहार पोर्ट: ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक और कारोबारी महत्व रखता है। अमेरिकी प्रतिबंध इस परियोजना को प्रभावित कर सकते हैं।


3. डॉलर में भुगतान: ईरान से जुड़े भारतीय कारोबार पर अमेरिकी वित्तीय कार्रवाई होने की स्थिति में डॉलर में लेन-देन करना कठिन हो सकता है।


4. भारत-ईरान व्यापार: ईरान के साथ कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों और संबंधित नियमों का पालन करना पड़ सकता है।


5. कूटनीतिक दबाव: अमेरिका भारत से ईरान के साथ आर्थिक रिश्ते सीमित करने के लिए दबाव डाल सकता है। भारत को ऐसे किसी फैसले में अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखना होगा।

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