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Iran-US Tension: ईरान पर ट्रम्प का शिकंजा और कसा, मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ा अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा
28 जन, 2026 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
Iran-US Tension: ईरान पर ट्रम्प का शिकंजा और कसा, मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ा अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा

Iran-US Tension: ईरान पर ट्रम्प का शिकंजा और कसा, मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ा अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका ने दबाव की रणनीति और तेज कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य और कूटनीतिक दबाव बढ़ाया जा रहा है। ट्रम्प का दावा है कि अमेरिका का एक और नौसैनिक बेड़ा ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है।


ईरान की ओर बढ़ रहा अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा

मंगलवार को दिए भाषण में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने अपनी समुद्री ताकत को और मजबूत किया है। हालांकि उन्होंने बेड़े की पूरी जानकारी साझा नहीं की।

 बीबीसी फारसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी युद्धपोत पहले ही मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है। यह न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर दुनिया के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में गिना जाता है।


ट्रम्प बोले- बातचीत को तैयार हो सकता है ईरान

ट्रम्प ने एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ हालात तेजी से बदल रहे हैं। उनका दावा है कि ईरान बातचीत के लिए उत्सुक है और उसके अधिकारी कई बार संपर्क कर चुके हैं। ट्रम्प के शब्दों में, “ईरान के पास वेनेजुएला से बड़ा आर्मडा है, लेकिन वह अब डील चाहता है।”


अमेरिका ने ईरान के सामने रखीं 4 सख्त शर्तें

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि बातचीत तभी होगी, जब ईरान इन शर्तों को माने। इस महीने अमेरिकी विशेष दूत ने शर्तें सार्वजनिक कीं—

यूरेनियम एनरिचमेंट पर पूर्ण प्रतिबंध

पहले से संवर्धित यूरेनियम को हटाना

लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या सीमित करना

क्षेत्रीय प्रॉक्सी बलों को सहायता बंद करना


पहले कार्यकाल से ही ईरान पर सख्त रहे हैं ट्रम्प

अपने पहले कार्यकाल (2017–2021) में ट्रम्प ने 2015 के परमाणु समझौते यानी JCPOA से अमेरिका को बाहर कर लिया था। यह समझौता ओबामा प्रशासन के दौरान हुआ था, जिसमें ईरान ने परमाणु गतिविधियों पर सख्त सीमाएं स्वीकार की थीं और बदले में उस पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंध हटाए गए थे।


ट्रम्प क्यों कहते हैं JCPOA को “खराब समझौता”

ट्रम्प का कहना रहा है कि यह समझौता ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा को खत्म नहीं करता, सिर्फ टालता है।

 उनका आरोप है कि यह समझौता—

बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक नहीं लगाता

क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स के समर्थन को नहीं रोकता

आतंकवाद और अमेरिकियों की हिरासत जैसे मुद्दों को नजरअंदाज करता है

8 मई 2018 को ट्रम्प ने JCPOA से बाहर निकलते हुए ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति लागू की।


‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति के तहत क्या हुआ

ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने की कोशिश

ऊर्जा, शिपिंग और बैंकिंग सेक्टर पर कड़े प्रतिबंध

1500 से ज्यादा नए प्रतिबंध

ईरान से व्यापार करने वाली विदेशी कंपनियों पर भी कार्रवाई की धमकी

ट्रम्प का दावा था कि इससे ईरान को झुकना पड़ेगा।


ईरान पर हमलों का भी जिक्र

ट्रम्प ने जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों का जिक्र किया।

 उनके मुताबिक फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित ठिकानों पर हमलों से ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई। हालांकि ईरान इन दावों से इनकार करता रहा है।


मिडिल ईस्ट में मजबूत अमेरिकी सैन्य मौजूदगी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड क्षेत्र में इस समय—

30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात

करीब 6 नौसैनिक जहाज मौजूद

3 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल

यह तैनाती बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और अन्य सैन्य अभियानों के लिए अहम मानी जा रही है।

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