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खतरनाक मोड़ पर जंग : पुतिन ने किया दावा - 58 घंटे में कर लेंगे यूक्रेन पर कब्जा, आखिर क्या है दोनों देशों के बीच जंग की वजह
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खतरनाक मोड़ पर जंग : पुतिन ने किया दावा - 58 घंटे में कर लेंगे यूक्रेन पर कब्जा, आखर क्या है दोनों देशों के बीच जंग की वजह

खतरनाक मोड़ पर जंग : पुतिन ने किया दावा - 58 घंटे में कर लेंगे यूक्रेन पर कब्जा, आखर क्या है दोनों देशों के बीच जंग की वजह

News World Desk
डेस्क रिपोर्टर
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कीव, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। रूस ने यूक्रेन पर दबाव बढ़ाने के लिए तीनों देशों से हमला करने का ऐलान कर दिया है। रूस ने यह घोषणा यूक्रेन द्वारा बातचीत से इंकार के बाद की है। हमले के तीसरे दिन रूस ने दावा किया है कि उसने 800 यूक्रेन सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है। इनमें 14 सैन्य हवाई क्षेत्र, 19 कमांड पोस्ट, 24 S300 एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम और फाइट रडार स्टेशन शामिल है। इसके अलावा यूक्रेनी नौसेना के 8 नौकाओं को भी तबाह कर दिया गया है।


58 घंटे में यूक्रेन पर कब्जे का दावा
इधर रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने दावा किया है कि रूस 58 घंटे में यूक्रेन पर कब्जा कर लेगा। वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेन्स्की ने कहा कि हम हार नहीं मानेंगे। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि यूक्रेन की राजधानी कीव पर अग्रिम कार्रवाई में शामिल अधिकांश रूसी सैनिक अब शहर के केंद्र से 30 किलोमीटर दूर है। रक्षा मंत्रालय ने ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक खुफिया अपडेट में कहा, रूस ने अभी तक यूक्रेन के हवाई क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल नहीं किया है, जिसकी वजह से रूसी वायुसेना अपना ज्यादा असर नहीं दिखा सकी है।

जंग अब दूसरे देशों तक पहुंची
उधर रूस और यूक्रेन की जंग अब दूसरे देशों तक पहुंचने लगी है। समाचार मिले हैं कि फ्रांस की नेवी ने रूस के एक कार्गो शिप को अपने कब्जे में ले लिया है। यूक्रेन की समुद्री सीमा में मौजूद जापान के एक शिप पर मिसाइल हमला किया गया है। हमले में यूक्रेन के रिहायशी इलाके में जमकर बर्बादी हुई है। इसके पहले शुक्रवार को यूएनएससी में रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया गया, जिसमें भारत चीन और यूएई ने वोट नहीं दिया वैसे रूस ने प्रस्ताव को वीटो कर दिया।

रूस इस्तेमाल कर सकता है फादर ऑफ ऑल बॉम्ब
पश्चिमी देशों ने चेतावनी जारी की है कि यूक्रेन पर रूस हमला अबतक का सबसे भयानक रूप अख्तियार कर सकता है। पुतिन यूक्रेन के खिलाफ फादर ऑफ ऑल बॉम्ब इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। एक्सपर्ट के मुताबिक 2007 में विकसित किए गए इस बम के गिरने से सुपरसोनिक लहर उठती है, जो इसके टारगेट को भाप में बदल देती है। इसके फटने से 14 टन टीएनटी के बराबर विस्फोट होता है। खास बात यह है कि इसे फाइटर जेट से भी गिराया जा सकता है।

अब तक 198 लोगो की हुई मौत
यूक्रेन के स्वास्थ्य मंत्री विक्टर लयाशको ने कहा कि रूस के हमले में 198 लोग मारे गए हैं और 1000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेंकोव ने शनिवार को दक्षिण यूक्रेन में मेलिटोपोल शहर पर भी कब्जा कर लिया।

क्या है जंग की वजह
एक जमाने में सोवियत संघ का हिस्सा रहे यूक्रेन और रूस की अदावत की वजह क्या है, आखिर ऐसा क्या हुआ कि पुतिन ने सेना को युद्ध का ऑर्डर दे दिया। रूस-यूक्रेन के बीच तनाव नवंबर 2013 में तब शुरू हुआ जब यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच का कीव में विरोध शुरू हुआ। यानुकोविच को रूस का समर्थन हासिल था। जबकि प्रदर्शनकारियों को अमेरिका और ब्रिटेन का बगावत के चलते फरवरी 2014 में यूक्रेन के राष्ट्रपति यानुकोविच को देश छोड़कर रूस में शरण लेनी पड़ी थी। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई और पलटवार करते हुए रूस ने दक्षिण यूक्रेन क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। बात यहीं नहीं रुकी रूस ने यूक्रेन के अलगाववादियों को खुला समर्थन दिया, तभी से यूक्रेन सेना और अलगाववादियों के बीच जंग जारी है। अलगाववादियों से निपटने के लिए यूक्रेन ने नई रणनीति बनाई। यूक्रेन ने नाटो से दोस्ती गांठी और खुल्लम-खुल्ला अमेरिका की शरण में पहुंच गया। बात तब बिगड़ी जब यूक्रेन ने नाटो में शामिल होने की तैयारी शुरू कर दी। रूस चाहता है कि यूक्रेन नाटो का हिस्सा ना बने, इसके पीछे तर्क यह है कि यूक्रेन अगर नाटो से जुड़ता है तो रूस पूरी तरह घिर जाएगा।

क्या है नाटो?
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन यानी नाटो 1949 में बना एक सैन्य गठबंधन है। जिसमें शुरुआत में 12 देश थे, इसमे अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस शामिल थे। इस संगठन का मूल्य सिद्धांत यह है कि यदि एक सदस्य देश पर हमला होता है तो, बाकी देश उसकी मदद के लिए आगे आएंगे। ये यूरोपीय देशों एक सैन्य गठबंधन है और इसमें भौगोलिक स्थिति के हिसाब से सामरिक शक्ति को बढ़ाने के लिए सदस्य जोड़े जाते हैं। अपनी भौगोलिक स्थिति और कूटनीतिक कारणों से भारत नाटो का सदस्य नहीं है। दरअसल नाटो में कोई भी एशियाई देश सदस्य नहीं है। इसका मूल मकसद दूसरे विश्वयुद्ध के बाद रूस के यूरोप में विस्तार को रोकना था। 1955 में सोवियत रूस में नाटो के जवाब में पूर्वी यूरोप के साम्यवादी देशों के साथ मिलकर वारसा पैक नाम का संगठन खड़ा किया, लेकिन 1991 में सोवियत यूनियन के विघटन के बाद वारसा पैक का हिस्सा रहे कई देशों ने दल बदल लिया और वह नाटो में शामिल हो गए। इस समय नाटो में 30 देश सदस्य हैं।

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