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World Press Freedom Index 2025: भारत 151वें स्थान पर, फंडिंग की कमी से जूझ रहा दुनिया भर का मीडिया, चीन-वियतनाम में सेंसरशिप चरम पर!
03 मई, 2025 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
World Press Freedom Index 2025: भारत 151वें स्थान पर, फंडिंग की कमी से जूझ रहा दुनिया भर का मीडिया, चीन-वियतनाम में सेंसरशिप चरम पर!

World Press Freedom Index 2025: भारत 151वें स्थान पर, फंडिंग की कमी से जूझ रहा दुनिया भर का मीडिया, चीन-वियतनाम में सेंसरशिप चरम पर!

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

पेरिस स्थित इंटरनेशनल NGO "रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स" (RWB) ने 2025 का वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी किया है, जिसमें भारत को 180 देशों में से 151वां स्थान दिया गया है। पिछले साल भारत 159वें पायदान पर था, यानी इस साल 8 पायदानों की मामूली सुधार दिखी है, लेकिन यह स्थिति अभी भी ‘गंभीर चिंता’ वाली श्रेणी में आती है।


सबसे ऊपर और सबसे नीचे कौन?

✔️ नॉर्वे एक बार फिर सबसे ऊपर (1st रैंक) पर है,

✖️ जबकि इरीट्रिया को सबसे नीचे (180वीं रैंक) रखा गया है।

➡️ भारत से नीचे भूटान, पाकिस्तान, तुर्किये, फिलिस्तीन, चीन, रूस, अफगानिस्तान, सीरिया और उत्तर कोरिया हैं।


मीडिया के सामने आर्थिक संकट

रिपोर्ट में बताया गया है कि इंडेक्स के इतिहास में पहली बार इकोनॉमिक इंडिकेटर सबसे निचले स्तर पर पहुंचा है।

गूगल, फेसबुक, अमेज़न, एपल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे टेक दिग्गजों का डिजिटल ऐड पर बढ़ता दबदबा मीडिया हाउसों की आय में भारी गिरावट ला रहा है। पहले जो विज्ञापन पारंपरिक मीडिया को मिलते थे, अब उसका बड़ा हिस्सा इन तकनीकी प्लेटफॉर्म्स को जा रहा है।


राजनीतिक नियंत्रण और सशर्त फंडिंग

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भारत, लेबनान, आर्मेनिया और बुल्गारिया जैसे देशों में मीडिया संस्थान नेताओं और बिजनेसमैन की सशर्त फंडिंग पर निर्भर हैं, जिससे पत्रकारिता की स्वतंत्रता प्रभावित होती है।


अमेरिका भी गिरा

अमेरिका की रैंकिंग भी गिरी है – वह 55वें स्थान से फिसलकर अब 57वें स्थान पर आ गया है। RWB ने डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल के दौरान प्रेस पर पड़े दबाव को इस गिरावट का कारण बताया।


गाजा में पत्रकारों की दर्दनाक स्थिति

➡️ इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के चलते गाजा में अब तक 200 से ज्यादा पत्रकार मारे जा चुके हैं।

➡️ इजरायली हमलों में कई न्यूज़ रूम तबाह हो चुके हैं।

➡️ फिलिस्तीन को इस बार 163वीं रैंक मिली है।


सरकारी सेंसरशिप और दबाव

⭕ चीन और वियतनाम जैसे देशों में पत्रकारिता पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण और सेंसरशिप के अधीन है।

⭕ स्वतंत्र पत्रकारों को धमकियां मिलती हैं।

⭕ विदेशी मीडिया संस्थानों को कभी भी ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।


दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी प्रेस आज़ादी से वंचित

⬇️ रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 42 देशों, जहां आधी से ज्यादा आबादी रहती है, वहां प्रेस की स्वतंत्रता "बहुत गंभीर" स्थिति में है।

⬇️ यहाँ पत्रकारों को जान का खतरा है, और स्वतंत्र रिपोर्टिंग लगभग नामुमकिन है।

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