
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच पाकिस्तान के सामने बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। कतर ने पाकिस्तान को एलएनजी (LNG) गैस की सप्लाई रोकने का नोटिस जारी कर दिया है, जिससे देश की ऊर्जा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के पास फिलहाल कुछ ही दिनों का तेल और गैस स्टॉक बचा है। ऐसे में कतर का यह फैसला पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर से
पाकिस्तान की गैस जरूरत का अधिकांश हिस्सा आयातित LNG से पूरा होता है। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की लगभग 99% LNG जरूरत कतर और संयुक्त अरब अमीरात से पूरी होती है। इन दोनों देशों से सप्लाई रुकने पर पाकिस्तान के पास लगभग कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं बचता। इसके विपरीत भारत के पास ऊर्जा आयात के कई विकल्प मौजूद हैं, जिससे संकट की स्थिति में सप्लाई को दूसरे स्रोतों से संतुलित किया जा सकता है।
पाकिस्तान सरकार ने जताई चिंता
कतर के नोटिस के बाद पाकिस्तान के फेडरल एनर्जी मिनिस्टर अली परवेज मलिक ने भी स्थिति को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि अगर LNG सप्लाई लंबे समय तक बंद रहती है तो देश के ऊर्जा क्षेत्र पर इसका सीधा असर पड़ेगा और आने वाले दिन मुश्किल हो सकते हैं।
मिडिल ईस्ट युद्ध बना वजह
कतर के इस फैसले के पीछे मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष बताया जा रहा है। इन दिनों इजरायल और ईरान के बीच युद्ध तेज हो गया है। इसी दौरान ईरान ने कतर के कुछ ऊर्जा प्लांटों को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले किए। सुरक्षा कारणों से कतर ने LNG उत्पादन और निर्यात अस्थायी रूप से रोक दिया है और जिन देशों को सप्लाई दी जाती थी उन्हें नोटिस जारी कर दिया है।
पाकिस्तान में बिजली संकट की आशंका
अगर LNG की सप्लाई लंबे समय तक बंद रहती है तो पाकिस्तान में बड़ा बिजली संकट पैदा हो सकता है। क्योंकि देश के कई बिजली संयंत्र गैस आधारित हैं और LNG की कमी से बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान के सामने एक और समस्या है: कच्चे तेल का स्टॉक भी सीमित बताया जा रहा है, आयात में बाधा आने पर पेट्रोल और डीजल सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है
वैकल्पिक विकल्प तलाशना मुश्किल
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के लिए इस समय सबसे बड़ी समस्या वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों की कमी है। यदि कतर और यूएई से LNG सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है, तो पाकिस्तान को महंगे स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ सकती है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति पर और दबाव बढ़ेगा।
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