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वंदे मातरम् के 150 साल: सरकारी कार्यक्रमों में अब पुरे 6 अंतरों का गायन और वादन अनिवार्य, केंद्र सरकार ने बदले नियम

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वंदे मातरम् के 150 साल: सरकारी कार्यक्रमों में अब पुरे 6 अंतरों का गायन और वादन अनिवार्य, केंद्र सरकार ने बदले नियम

वंदे मातरम् के 150 साल: सरकारी कार्यक्रमों में अब पुरे 6 अंतरों का गायन और वादन अनिवार्य, केंद्र सरकार ने बदले नियम

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। देश के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर केंद्र सरकार ने इसकी प्रस्तुति को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक अब खास सरकारी आयोजनों में राष्ट्रगीत के पूरे छह अंतरों का गायन या वादन जरूरी होगा। पहले जहां इसका छोटा संस्करण करीब 65 सेकंड का बजाया जाता था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 3 मिनट 10 सेकंड कर दिया गया है।


किन मौकों पर बजेगा पूरा संस्करण

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्रीय ध्वज फहराने, उनके संबोधन या राष्ट्र के नाम संदेश जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर यह नियम लागू रहेगा। तय समय सीमा के भीतर ही कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि इसकी प्रस्तुति एक समान तरीके से हो सके।


स्कूलों में रोजाना होगा सामूहिक गायन

सरकार ने स्कूलों के लिए भी खास निर्देश दिए हैं। देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से करने की सलाह दी गई है। अगर किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों गाए जाएं, तो पहले राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही, वंदे मातरम् बजते समय उपस्थित सभी लोगों का सावधान मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य रहेगा।


इतिहास: 1875 में लिखा गया, 1937 में बदले गए थे छंद

वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में की थी, जिसे बाद में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित किया गया। मूल रचना में छह छंद थे, लेकिन 1937 में इनमें से चार हिस्सों को हटाया गया था। अब सरकार ने फिर से पूरे छह छंदों को शामिल करने का फैसला लिया है। हालांकि, यह नियम सिनेमा हॉल जैसी सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों पर लागू नहीं होगा।


सरकार का उद्देश्य क्या है

सरकार का कहना है कि नए बदलावों का मकसद राष्ट्रगीत के सम्मान और प्रस्तुति में एकरूपता लाना है। विस्तारित संस्करण के जरिए राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अधिक प्रभावी तरीके से सामने लाने की कोशिश की जा रही है।

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