
भोपाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के बाद मतदाता संख्या को लेकर तस्वीर लगभग साफ हो गई है। सर्वे और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शहर की वोटर लिस्ट से 3.80 लाख से ज्यादा नाम कम हो गए हैं। सबसे ज्यादा असर गोविंदपुरा और नरेला विधानसभा में देखने को मिला है, जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। अब सभी की नजर 21 फरवरी को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर है।
एसआईआर की प्रक्रिया कैसे हुई पूरी?
चुनाव आयोग ने 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची जारी की थी। इसके बाद 22 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अपने-अपने बूथों पर मौजूद रहे और नए फॉर्म-6, 7 और 8 के जरिए आवेदन लिए गए। जिन मतदाताओं को ‘नो मैपिंग’ में रखा गया था, उन्हें नोटिस भेजकर 50 दिन के भीतर रिकॉर्ड की जांच की गई। यह पूरी प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरी कर ली गई है।
पहले कितने थे वोटर, अब कितने रह गए?
एसआईआर से पहले 27 अक्टूबर 2025 तक भोपाल में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाता दर्ज थे। संशोधन प्रक्रिया के बाद यह संख्या घटकर 17 लाख 45 हजार 552 रह गई है। यानी करीब 3 लाख 80 हजार 357 मतदाताओं के नाम सूची से हट गए हैं।
सातों विधानसभा क्षेत्रों में क्या बदला?
भोपाल की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर वोटर संख्या में अलग-अलग स्तर पर कमी दर्ज की गई है।
बैरसिया में सबसे कम 8,889 नाम कम हुए, यहां बीजेपी के विष्णु खत्री विधायक हैं।
भोपाल उत्तर से 44,094 मतदाता घटे, जहां कांग्रेस के आतिफ अकील विधायक हैं।
नरेला में 70,917 नाम कम हुए, यह मंत्री विश्वास सारंग का क्षेत्र है।
भोपाल दक्षिण-पश्चिम में 61,515 मतदाताओं के नाम हटे, यहां बीजेपी के भगवानदास सबनानी विधायक हैं।
भोपाल मध्य में 62,960 नाम कम हुए, यह कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की सीट है।
गोविंदपुरा में सबसे ज्यादा 81,143 वोटर घटे, जहां मंत्री कृष्णा गौर लगातार जीतती रही हैं।
हुजूर विधानसभा से 50,838 नाम कम हुए, यहां बीजेपी के रामेश्वर शर्मा विधायक हैं।
थर्ड जेंडर वोटर्स की संख्या भी घटी
एसआईआर के बाद थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। पहले कुल 166 थर्ड जेंडर वोटर थे, जो अब घटकर 72 रह गए हैं। खास तौर पर भोपाल मध्य विधानसभा में यह आंकड़ा 104 से घटकर 35 पर पहुंच गया है।
21 फरवरी को जारी होगी फाइनल सूची
अब सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद चुनाव आयोग 21 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी करेगा। नई सूची आने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि आगामी चुनावों में भोपाल की सियासी तस्वीर किस तरह बदल सकती है।
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