
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से सामने आया एक मामला अब मिसाल बन गया है। ट्रेन यात्रा के दौरान हादसे में जान गंवाने वाले रवि कुमार शर्मा के परिवार को आखिरकार न्याय मिल गया है। महज 45 पैसे में लिया गया ट्रैवल इंश्योरेंस लंबे संघर्ष के बाद अब 10 लाख रुपये के भुगतान में बदल गया है। भोपाल उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की देरी पर सख्त टिप्पणी करते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया है।
कैसे हुआ था हादसा
जानकारी के मुताबिक रवि कुमार शर्मा ने Indian Railway Catering and Tourism Corporation (IRCTC) के जरिए भोपाल एक्सप्रेस का ऑनलाइन टिकट बुक किया था और साथ में ट्रेवल इंश्योरेंस भी लिया था। 21 अक्टूबर 2020 की रात मुरैना स्टेशन पर तेज बारिश और अंधेरे के बीच बिजली गुल थी। कोच डिस्प्ले बंद होने के कारण जब वे अपने डी-1 कोच तक पहुंचे तो दरवाजा बंद मिला। ट्रेन अचानक चलने लगी और पायदान पर चढ़ते समय उनका पैर फिसल गया, जिससे वे ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच गिर पड़े। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बीमा कंपनी ने क्लेम टाला, परिवार पहुंचा आयोग
पत्नी मनीषा शर्मा ने अगस्त 2021 में Bajaj Allianz General Insurance में सभी दस्तावेज जमा कर क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने दस्तावेज अधूरे बताकर भुगतान नहीं किया। बार-बार कोशिश के बावजूद जब सुनवाई नहीं हुई तो परिवार ने 30 सितंबर 2022 को भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज कराया।
आयोग का सख्त आदेश: 10 लाख रुपए ब्याज सहित
सुनवाई के बाद आयोग की बेंच-2 ने माना कि यात्री के पास वैध टिकट और इंश्योरेंस था और दुर्घटना यात्रा के दौरान ही हुई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र और एफआईआर समेत सभी दस्तावेज पहले ही जमा किए जा चुके थे। आयोग ने बीमा कंपनी को शिकायत की तारीख से 7 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ 10 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक और आर्थिक नुकसान के लिए 10 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 5 हजार रुपये अलग से देने को कहा गया है। तय समय में भुगतान नहीं होने पर ब्याज 9 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।
IRCTC की भूमिका पर आयोग की टिप्पणी
आयोग ने साफ किया कि IRCTC की जिम्मेदारी टिकट बुकिंग तक सीमित थी। बीमा राशि का भुगतान करना पूरी तरह बीमा कंपनी की जिम्मेदारी थी। आदेश में यह भी कहा गया कि अनुबंध के मुताबिक 15 दिन में क्लेम का निपटारा होना चाहिए था, लेकिन दो साल तक भुगतान न करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा है।
परिवार का दर्द और वकील की सलाह
मृतक की पत्नी मनीषा शर्मा का कहना है कि पति की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी उन पर आ गई और सिलाई का काम कर किसी तरह परिवार चला रही हैं। वहीं केस की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अरुण सिंह राणा ने कहा कि टिकट बुक करते समय लिया गया छोटा सा ट्रैवल इंश्योरेंस हादसे की स्थिति में परिवार के लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है।
रेलवे ट्रैवल इंश्योरेंस क्या होता है
ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों को वैकल्पिक ट्रैवल इंश्योरेंस का विकल्प मिलता है। इसका प्रीमियम आम तौर पर 35 से 45 पैसे के बीच होता है, लेकिन दुर्घटना की स्थिति में यह लाखों रुपये तक की आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ यात्रियों को टिकट बुक करते समय इस विकल्प को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

