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एमपी में 7 फीट उंचे बाघ! सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में टाइगर आकलन में मिले चौंकाने वाले संकेत

12 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
एमपी में 7 फीट उंचे बाघ! सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में टाइगर आकलन में मिले चौंकाने वाले संकेत

एमपी में 7 फीट उंचे बाघ! सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में टाइगर आकलन में मिले चौंकाने वाले संकेत

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। जंगल की गहराइयों में तीन दिनों तक चला रोमांचक सर्वे अब कई नए रहस्य खोल रहा है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) में बाघ आकलन के पहले चरण में ऐसी खरोंचें मिली हैं जो 7 फीट ऊंचाई तक दर्ज हुईं—यानी जंगल के ये बादशाह न सिर्फ ताकत में बल्कि कद में भी बेहद जबरदस्त हैं। पगमार्क से लेकर पेड़ों की छाल पर उकेरी गई नाखूनों की लकीरें तक, हर निशान बता रहा है कि सतपुड़ा के टाइगर मध्यप्रदेश के सबसे सशक्त शिकारियों में शामिल हैं।


कैसे हुआ Tiger Sign Survey पूरा?

तीन दिन चले इस साइन सर्वे में एसटीआर के मैदानी अमले और वालंटियरों ने हजारों निशानों का विश्लेषण किया।

 सर्वे के अनुसार—

नर बाघ का वजन: 180–220 किलो

नर बाघ की लंबाई (पूंछ सहित): लगभग 7 फीट

बाघिन का वजन: 150–180 किलो

बाघिन की लंबाई: 4–5 फीट

पगमार्क के साथ पेड़ों पर उकेरी गई क्लॉ मार्किंग (Claw Marking) ने बताया कि बाघ अपना क्षेत्र निर्धारित करने में इन निशानों का उपयोग करते हैं। कई स्थानों पर 5 से 7 फीट तक ये खरोंचें दर्ज की गईं।


दूसरे बाघ की मौजूदगी क्यों नहीं पसंद करते टाइगर?

चूरना रेंजर आरबी पाठक ने बताया कि बाघ अपने इलाके में किसी भी दूसरे बाघ की उपस्थिति को पसंद नहीं करता। उन्होंने कहा, “बाघ पेड़ों के तनों पर अपनी ऊँचाई के अनुरूप नाखूनों से खरोंच के निशान लगाता है, जिससे उसकी शक्ति और प्रभुत्व का संकेत मिलता है। इससे कमजोर बाघ उस क्षेत्र में प्रवेश नहीं करते, जबकि अधिक बलशाली बाघ चुनौती दे सकते हैं। बाघ गंध चिह्निकरण (Scent Marking) भी करता है, जिससे अन्य बाघ दूर रहते हैं। क्लॉ मार्किंग के दौरान बाघ अपने नाखूनों में फंसे मांस और बालों को भी मुलायम छाल से रगड़कर साफ करता है।” बयानों में दिए गए तथ्यों के अनुसार बाघ अपने इलाके की सुरक्षा और पहचान दोनों के लिए इन खरोंचों का उपयोग करता है।


एमपी के टाइगर: लंबाई और वजन में अव्वल

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में मिले इन भारी-भरकम बाघों के संकेतों पर फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने कहा, “एमपी के एसटीआर में सात फीट तक ऊंचाई पर बाघों के नाखूनों के निशान मिले हैं। हमारे यहां के बाघ लंबाई और वजन में अत्यंत सशक्त हैं। भोजन प्रबंधन और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे संख्या निरंतर बढ़ रही है।” संरक्षण के लगातार प्रयासों की वजह से सतपुड़ा में टाइगर पॉपुलेशन भी बेहतर स्थिति में है।

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