
हरदा में स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के हस्तांतरण विलेख के निष्पादन योजना के तहत 10 हितग्राहियों को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्राम गोंदागांव के निर्भयदास और भैयालाल सहित हितग्राहियों को मालिकाना हक के दस्तावेज सौंपे।
वर्ष 2026 के हितग्राहियों को मिले इन प्रमाण-पत्रों से ग्रामीणों को अपनी भूमि पर कानूनी अधिकार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र ग्रामीण को उसकी जमीन का अधिकार दिलाना है।
निर्भयदास और भैयालाल को भी मिली रजिस्ट्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरदा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ग्राम गोंदागांव के श्री निर्भयदास और श्री भैयालाल को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र दिए। इनके अलावा 8 अन्य हितग्राहियों को भी दस्तावेज सौंपे गए। इस तरह कुल 10 ग्रामीणों को संपत्ति का विधिवत मालिकाना हक मिला।
जमीन की रजिस्ट्री से ग्रामीणों को क्या फायदा होगा?
मुख्यमंत्री के अनुसार, स्वामित्व योजना ग्रामीणों को कानूनी सुरक्षा देने के साथ आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी मददगार है। रजिस्ट्री मिलने से संपत्ति का मूल्य बढ़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होने की उम्मीद है। मालिकाना हक के दस्तावेज मिलने के बाद हितग्राहियों ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि अब अपनी जमीन के आधार पर बैंक से ऋण लेने में सुविधा होगी।
जमीन पर निर्माण और दूसरे काम कर सकेंगे मालिक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रजिस्ट्री धारक अपनी भूमि पर निश्चिंत होकर निर्माण सहित अन्य कार्य कर सकेंगे। उन्होंने भू-स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी जोर दिया।
सरकार का उद्देश्य पात्र ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का अधिकार उपलब्ध कराना है, ताकि वे जमीन से जुड़े कार्य कानूनी रूप से कर सकें।
रजिस्ट्री जारी करने की प्रक्रिया पर CM का निर्देश
मुख्यमंत्री ने निष्पादन अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासकीय कार्य के निष्पादन के दौरान, राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में निष्पादन अधिकारी घोषित होने की स्थिति में किसी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्री का निष्पादन अभिलेख में दर्ज जानकारी के आधार पर ही किया जाएगा।
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