
भोपाल में प्रस्तावित नए स्टेट कैपिटल कॉम्प्लेक्स यानी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की तैयारी तेज हो गई है। करीब 1000 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह प्रशासनिक केंद्र सरकारी विभागों को एक ही परिसर में लाने और आधुनिक सुविधाएं देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
DPR को लेकर प्रशासन की सख्ती, 4 महीने की डेडलाइन
राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में प्रोजेक्ट के प्रारंभिक स्वरूप पर सहमति जताई है। हाउसिंग बोर्ड को निर्देश दिए गए हैं कि 30 जून तक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर ली जाए। डिजाइन और डीपीआर के लिए अनुभवी आर्किटेक्चर फर्म को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसने पहले भी बड़े संस्थानों की डिजाइनिंग की है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि परियोजना को कॉर्पोरेट स्तर की आधुनिकता के साथ विकसित किया जाएगा।
कॉरपोरेट स्टाइल हाईटेक ऑफिस, विभागों की बढ़ी दिलचस्पी
सरकार ने विभिन्न विभागों से उनकी स्पेस और स्थानांतरण संबंधी जरूरतों की जानकारी मांगी थी। अब तक मिले जवाबों के अनुसार कई विभाग नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट होने के इच्छुक हैं। कई कार्यालयों ने मिलकर लगभग 1 लाख वर्ग मीटर से अधिक जगह की मांग की है। कुछ विभाग अपने मौजूदा भवनों के कारण फिलहाल शामिल नहीं होना चाहते। नई जमीन देने के बजाय सभी जरूरतों को इसी कॉम्प्लेक्स में समायोजित करने की योजना है। इस कदम का मकसद अलग-अलग जगह फैले सरकारी दफ्तरों को एकीकृत करना और कामकाज की गति बढ़ाना है।
पुराने भवनों की जगह बनेगा आधुनिक प्रशासनिक हब
नया सेंट्रल विस्टा सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह विकसित किया जाएगा। अभी जहां लगभग 76 हजार वर्ग मीटर का निर्माण क्षेत्र है, वहीं नई योजना में इसे बढ़ाकर करीब 1.60 लाख वर्ग मीटर करने का प्रस्ताव है।
12 टॉवर और नई वास्तुकला
नई डिजाइन में वल्लभ भवन की शैली से प्रेरित 12 टॉवर बनाए जाने की योजना है, जिससे पूरा परिसर एकीकृत और सुव्यवस्थित नजर आएगा।
तापमान कंट्रोल और सोलर पावर पर जोर
प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसका पर्यावरणीय डिजाइन माना जा रहा है। सभी टॉवर की छतों को जोड़कर परगोला बनाने का विचार है, जिससे परिसर का तापमान कम रखने में मदद मिलेगी और सोलर ऊर्जा का उत्पादन भी संभव होगा। फिलहाल इस हिस्से के खर्च का विस्तृत आकलन मांगा गया है।
अगले 50 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर पार्किंग प्लान
नई योजना में पार्किंग को भविष्य की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है। अनुमान है कि अगले कई दशकों तक बढ़ने वाली गाड़ियों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त स्पेस तैयार किया जाएगा। इसी क्रम में कुछ मौजूदा पार्किंग क्षेत्रों को हटाकर शुरुआती टॉवर निर्माण शुरू करने की तैयारी है।
ग्रीन एरिया और पब्लिक कनेक्टिविटी पर फोकस
नए कॉम्प्लेक्स में हरियाली को भी खास महत्व दिया गया है।
ग्रीन एरिया को चार गुना तक बढ़ाने की योजना है।
आसपास के मेट्रो स्टेशन से कवर्ड फुटपाथ बनाए जाएंगे।
हॉकर्स कॉर्नर, टॉयलेट और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतर व्यवस्था भी शामिल है।
इसके अलावा सड़कों के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का भी प्रस्ताव है ताकि आम लोगों की आवाजाही आसान हो सके।
क्यों जरूरी है नया स्टेट कैपिटल कॉम्प्लेक्स?
भोपाल में कई सरकारी विभाग अलग-अलग इलाकों में फैले हुए हैं। बढ़ती प्रशासनिक जरूरतें, नई भर्तियां और पुराने भवनों की जर्जर हालत लंबे समय से नई व्यवस्था की मांग कर रही थीं। नई दिल्ली के सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर तैयार हो रहा यह कॉम्प्लेक्स प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने और नागरिकों को एक ही स्थान पर सेवाएं देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।
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