
धार। मध्य प्रदेश के धार की ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर कानूनी बहस के केंद्र में है। इस विवादित परिसर को लेकर आज हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है, जहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।
हाई कोर्ट में आज अहम सुनवाई
धार की भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में आज एक अहम दिन माना जा रहा है। इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। इस सुनवाई में मुख्य रूप से ASI द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट पर चर्चा होगी। कोर्ट दोनों पक्षों की आपत्तियों और दावों को सुनने के बाद यह तय कर सकता है कि मामले में आगे किस तरह की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुनवाई आगे आने वाले फैसले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
98 दिनों तक चला वैज्ञानिक सर्वे
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने भोजशाला परिसर का विस्तृत सर्वे कराया था। यह प्रक्रिया करीब 98 दिनों तक चली। इस दौरान कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें शामिल हैं:
ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR)
उच्च गुणवत्ता वाली फोटोग्राफी
पुरातात्विक संरचनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन
इन सभी जांचों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई, जिसे अदालत में जमा किया जा चुका है। रिपोर्ट की प्रतियां मामले से जुड़े सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई हैं।
मुस्लिम पक्ष ने मांगे वीडियोग्राफी साक्ष्य
सुनवाई से पहले मुस्लिम पक्ष ने सर्वे से जुड़े वीडियो रिकॉर्डिंग के साक्ष्य पेश करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सर्वे के दौरान की गई वीडियोग्राफी अदालत के सामने रखी जानी चाहिए, ताकि रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जा सके। दूसरी ओर, हिंदू पक्ष का दावा है कि सर्वे के दौरान मिले कुछ पुरातात्विक संकेत प्राचीन मंदिर संरचना की ओर इशारा करते हैं।
क्या है भोजशाला विवाद का इतिहास
- धार की भोजशाला को लेकर कई दशकों से विवाद चला आ रहा है।
- हिंदू समुदाय इसे देवी वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर मानता है।
- मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह कमाल मौला की मस्जिद है।
फिलहाल प्रशासनिक व्यवस्था के तहत मंगलवार को हिंदू पक्ष पूजा करता है और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष नमाज अदा करता है। यह व्यवस्था वर्षों से लागू है और इसी के बीच कानूनी लड़ाई भी चल रही है।
एएसआई रिपोर्ट से क्या बदल सकता है
ASI की सर्वे रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है। अदालत इस रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई तय कर सकती है। यदि अदालत को रिपोर्ट में ठोस पुरातात्विक प्रमाण मिलते हैं, तो यह मामले की दिशा बदलने वाला कदम साबित हो सकता है।
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