
रिपोर्ट : अतुल जैन
बामौर कलां। मोचनी एकादशी के पावन अवसर पर ग्राम बामौर कलां स्थित श्री बांके बिहारी जी मंदिर से भगवान श्री बांके बिहारी जी एवं लाड़ली जू राधा रानी के दिव्य विमान की भव्य शोभायात्रा विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। इस अवसर पर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए और भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर परिसर में विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्री बांके बिहारी जी और राधा रानी की विशेष पूजा-अर्चना से हुई। पुजारियों द्वारा भगवान का श्रृंगार कर आरती की गई और श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात भगवान के सुसज्जित विमान को आकर्षक रूप से सजाकर शोभायात्रा के लिए तैयार किया गया।
शोभायात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए निकाली गई। शोभायात्रा में श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। ढोल-नगाड़ों की गूंज, शंखनाद तथा राधा-कृष्ण के होली भजनों की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
शोभायात्रा में शामिल भजन-संगीत मंडलियों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भक्ति संगीत की धुनों पर श्रद्धालु झूमते हुए नजर आए और अनेक स्थानों पर भक्तों ने भक्ति भाव से नृत्य कर भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा भगवान के विमान पर पुष्पवर्षा की गई और गुलाल उड़ाकर स्वागत किया गया। इस दौरान पूरा नगर भक्ति, उत्साह और उल्लास के रंग में रंगा हुआ दिखाई दिया।
नगरवासियों के अनुसार बामौर कलां में यह धार्मिक परंपरा वर्ष 1936 से निरंतर चली आ रही है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पंडित श्री गजाधर प्रसाद थानेदार द्वारा कराया गया था। मंदिर निर्माण के समय से ही मोचनी एकादशी के अवसर पर भगवान श्री बांके बिहारी जी एवं लाड़ली जू राधा रानी के साथ नगर में होली खेलने की परंपरा प्रारंभ की गई थी, जो आज भी पूरे श्रद्धा भाव के साथ निभाई जा रही है।
परंपरा के अनुसार इस दिन सुबह लगभग 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक भगवान के संग गुलाल की होली खेली जाती है। इस दौरान ग्राम के नागरिक, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भगवान के साथ होली खेलते हैं और भक्ति भाव से झूमते नजर आते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि आस्था, श्रद्धा और सामाजिक एकता का प्रतीक भी बन चुका है।
इस परंपरा को पंडित गजाधर प्रसाद थानेदार के परिवार के सदस्य पीढ़ी दर पीढ़ी निभाते आ रहे हैं। आयोजन को सफल बनाने में कृष्ण कुमार दुबे (किस्सू महाराज) एवं अजय दुबे (दीपू) सहित अनेक श्रद्धालुओं की विशेष भूमिका रही।
विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी मोचनी एकादशी का यह धार्मिक आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं की आस्था और उमंग के बीच पूरा नगर गुलाल और भक्ति के रंग में सराबोर दिखाई दिया।
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