
भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे को जल्द ही ऐतिहासिक पहचान मिलने वाली है। यहां उज्जैन के विक्रमादित्य द्वार की तर्ज पर एक भव्य विक्रमादित्य द्वार बनाया जाएगा। शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस द्वार का विधिवत भूमिपूजन किया।
भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे पर बनेगा विक्रमादित्य द्वार
भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे पर बनने वाला यह विक्रमादित्य द्वार ठीक उज्जैन में बने विक्रमादित्य द्वार जैसा ही होगा। यह द्वार प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को और मजबूत करेगा।
फंदा में हुआ भूमिपूजन कार्यक्रम
भूमिपूजन कार्यक्रम भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे स्थित शासकीय महाराणा प्रताप स्कूल परिसर, फंदा में आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में प्रदेश की संस्कृति, इतिहास और विकास को लेकर अहम बातें कहीं। उन्होंने जहां भारत की पहचान भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़ी बताई, वहीं भोपाल के बड़े तालाब और किसानों की फसलों को लेकर भी बड़ा संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा, “हमारे देश की पहचान भगवान श्रीराम-कृष्ण से है।” मुख्यमंत्री ने प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा, “मध्यप्रदेश के साथ कई इतिहास जुटे हैं।” भोपाल के बड़े तालाब को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “बड़े तालाब को गहरा किया जाएगा।” “फसलों को बचाने के लिए सरकार हर एक कदम उठाएगी।”
कई जनप्रतिनिधि रहे उपस्थित
इस कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप, हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा, दक्षिण-पश्चिम विधायक भगवानदास सबनानी, बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल, जिलाध्यक्ष तीरथ मीणा, महापौर मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
भूमिपूजन से पहले विधायक ने किया tha निरीक्षण
भूमिपूजन से एक दिन पहले शुक्रवार को हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
सांस्कृतिक पहचान को मिलेगी नई पहचान
विक्रमादित्य द्वार के निर्माण से भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे को नई पहचान मिलेगी और यह क्षेत्र ऐतिहासिक व सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक आकर्षक बनेगा।
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