
मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए सरकार एक ऐसी सौगात लेकर आ रही है, जो उनके इलाज की चिंता को काफी हद तक खत्म कर देगी। अब अस्पताल में भर्ती होते ही जेब से पैसे निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इलाज का पूरा खर्च बीमा कंपनी सीधे अस्पताल को चुकाएगी और कर्मचारी सिर्फ इलाज पर ध्यान देंगे। लंबे समय से जिस बदलाव की मांग कर्मचारी संगठन कर रहे थे, सरकार ने उस दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिया है।
कैशलेस इलाज की सुविधा: अब जेब से नहीं देना होगा पैसा
राज्य सरकार कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करने जा रही है। इस योजना के लागू होते ही कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य जब किसी सूचीबद्ध अस्पताल में भर्ती होंगे, तो इलाज के लिए उन्हें किसी तरह का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। अब तक की व्यवस्था में कर्मचारी पहले इलाज कराते थे, फिर बिल लगाकर विभाग से पैसा वापस लेते थे। इसमें कई बार महीनों की देरी हो जाती थी, अनुमति लेने में परेशानी होती थी और आर्थिक दबाव भी झेलना पड़ता था। नई पॉलिसी में यह सारा झंझट खत्म हो जाएगा क्योंकि भुगतान सीधे बीमा कंपनी करेगी।
10 लाख कर्मचारियों को मिलेगा सीधा फायदा
इस योजना का फायदा प्रदेश के करीब 10 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलेगा। सरकार इस योजना को कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार कर रही है। कर्मचारियों के खाते से अलग-अलग स्लैब में प्रीमियम की राशि काटी जाएगी, जिससे योजना को लंबे समय तक सुचारु रूप से चलाया जा सके। इससे कर्मचारियों पर एकमुश्त कोई बड़ा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और उन्हें सालभर सुरक्षित स्वास्थ्य कवरेज मिलेगा।
सरकार भरेगी बड़ा हिस्सा, 600 करोड़ रुपये आएगा खर्च
इस योजना पर कुल मिलाकर करीब 600 करोड़ रुपये सालाना खर्च आने का अनुमान है। इसमें से लगभग 250 करोड़ रुपये राज्य सरकार सीधे बीमा कंपनी को प्रीमियम के रूप में देगी। बाकी करीब 350 करोड़ रुपये कर्मचारियों से अलग-अलग स्लैब में वसूले जाएंगे। यानी सरकार खुद इस योजना में बड़ी हिस्सेदारी निभा रही है ताकि कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सके।
इलाज की पूरी जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होगी
नए नियमों के तहत जैसे ही कर्मचारी किसी अधिकृत अस्पताल में भर्ती होगा, इलाज से जुड़ी पूरी प्रक्रिया बीमा कंपनी संभालेगी।
अस्पताल को भुगतान
बिल सेटलमेंट
दस्तावेजों की जांच
इन सबकी जिम्मेदारी अब बीमा कंपनी की होगी। इससे कर्मचारी को न तो विभागों के चक्कर काटने होंगे और न ही इलाज के बाद पैसा अटकने का डर रहेगा।
कब तक लागू होगी योजना, क्या है आगे की प्रक्रिया
इस प्रस्ताव को पहले स्वास्थ्य विभाग लागू करने की तैयारी में है। इसके बाद इसे सामान्य प्रशासन विभाग और फिर कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी। मंजूरी मिलते ही इसे प्रदेशभर में लागू कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि सरकार इसे जल्द से जल्द जमीन पर उतारने की तैयारी कर रही है।
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