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भोपाल में ‘डल झील’ जैसा नज़ारा! बड़े तालाब में उतरे 20 शिकारे, CM मोहन यादव ने खुद बैठकर की सैर

04 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में ‘डल झील’ जैसा नज़ारा! बड़े तालाब में उतरे 20 शिकारे, CM मोहन यादव ने खुद बैठकर की सैर

भोपाल में ‘डल झील’ जैसा नज़ारा! बड़े तालाब में उतरे 20 शिकारे, CM मोहन यादव ने खुद बैठकर की सैर

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। अब कश्मीर घूमने नहीं जाना पड़ेगा... डल झील की फीलिंग मिलेगी भोपाल में! बड़े तालाब में आज से 20 खूबसूरत शिकारे उतर गए हैं और इनका शुभारंभ खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया। इतना ही नहीं, CM ने शिकारे में बैठकर तालाब की सैर भी की। भोपाल के आसमान, पानी और शानदार नज़ारे के बीच यह अनुभव अब आम लोग भी ले सकेंगे। 


CM ने हरी झंडी दिखाई, मंत्री-विधायक भी रहे मौजूद

शिकारों को हरी झंडी दिखाते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद शिकारे में बैठे। उनके साथ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी भी मौजूद रहे। बोट क्लब पर हुए कार्यक्रम में हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।


शिकारा-बोट रेस्टोरेंट में चाय-पोहा, बाजार से खरीदी साड़ी- जैकेट

CM ने शिकारा-बोट रेस्टोरेंट में चाय, पोहा, समोसे और फलों का नाश्ता किया। इसके बाद उन्होंने फ्लोटिंग बोट मार्केट से साड़ी और जैकेट भी खरीदी। मुख्यमंत्री ने शिकारों की बनावट, आरामदायक सीटें और सुविधाओं की जमकर सराहना की।


कांग्रेस की तरफ से सिर्फ उमंग सिंघार पहुंचे

कार्यक्रम में बीजेपी और कांग्रेस के सभी विधायकों को न्योता दिया गया था, लेकिन कांग्रेस की ओर से सिर्फ नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ही पहुंचे। सिंघार ने कहा, “अच्छा काम होता है तो सरकार की सराहना करेंगे।”


CM बोले— वॉटर टूरिज्म को मिलेगा बूस्ट

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “इन शिकारों को कश्मीर की डल झील की तर्ज पर तैयार किया गया है। इससे वॉटर टूरिज्म और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा।”

 उन्होंने बताया कि इन शिकारों का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन निगम करेगा।


किराया, टाइमिंग और क्षमता— जानिए सब कुछ

हर शिकारे में बैठ सकेंगे: 4 लोग

आधे घंटे का किराया: ₹400

उपलब्धता: सुबह 9 बजे से सूर्यास्त तक

एक शिकारे की लागत: करीब ₹2.40 लाख

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प्रदूषण रहित तकनीक से बने हैं शिकारे

इन 20 शिकारों का निर्माण फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन (FRP) और उच्च गुणवत्ता की नॉन-रिएक्टिव सामग्री से किया गया है। यह सामग्री पानी के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करती, जिससे तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। शिकारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा बनाए गए हैं, जिन्होंने पहले केरल, बंगाल और असम में भी शिकारों का निर्माण किया है।


शिकारे से शॉपिंग भी, बर्ड वॉचिंग भी

पर्यटक सिर्फ सैर ही नहीं करेंगे, बल्कि हैंडीक्राफ्ट उत्पाद, स्थानीय व्यंजन, ऑर्गेनिक फल-सब्जियां और बर्ड वॉचिंग (दूरबीन से पक्षियों का नज़ारा) का भी आनंद उठा सकेंगे।


पहले ट्रायल, अब पूरे 20 शिकारे

नगर निगम ने 13 जून 2024 को एक शिकारा प्रायोगिक तौर पर चलाया था। अब एक साथ पूरे 20 शिकारे बड़े तालाब में उतारे गए हैं।


NGT की रोक के बाद सिर्फ सामान्य शिकारे

लगभग 10 महीने पहले, 12 सितंबर को NGT ने बड़े तालाब समेत प्रदेश के सभी वेटलैंड्स में क्रूज और मोटर बोट पर रोक लगा दी थी। इसलिए अब यहां सिर्फ सामान्य शिकारे ही चलाए जा रहे हैं। NGT के आदेश में कहा गया था कि डीजल इंजन से निकलने वाला सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड पानी को एसिडिक बना देता है, जो इंसान और जलीय जीवों दोनों के लिए खतरनाक और कैंसरकारक हो सकता है।


क्या होता है शिकारा?

शिकारा एक पारंपरिक लकड़ी की नाव होती है, जो खासतौर पर डल झील में देखने को मिलती है।

पीछे बैठकर नाविक चलाता है

आधा दर्जन लोग बैठ सकते हैं

साज-सज्जा और आराम में खास

 डल झील में ये पर्यटकों की पहली पसंद हैं और अब वही अनुभव मिलेगा भोपाल में।


भोपाल बनेगा वाटर-टूरिज्म हब

मध्यप्रदेश पर्यटन निगम का लक्ष्य है कि बड़े तालाब को डल झील जैसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन में बदला जाए, ताकि भोपाल देश का नया वॉटर टूरिज्म हब बन सके।

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