
भोपाल। बिना डॉक्टर की सलाह गर्भपात की दवाएं लेना अब एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है। मध्य प्रदेश में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां यह लापरवाही महिलाओं और युवतियों की जान पर भारी पड़ रही है।
बुरहानपुर की घटना ने बढ़ाई चिंता
बुरहानपुर में हाल ही में एक गर्भवती छात्रा की मौत ने इस मुद्दे को गंभीर बना दिया है। दवा दुकान से लाई गई अबॉर्शन पिल खाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान जान चली गई। यह घटना साफ दिखाती है कि बिना मेडिकल निगरानी के दवा लेना कितना खतरनाक हो सकता है—और ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है।
रोजाना सामने आ रहे गंभीर केस
राजधानी भोपाल के सरकारी और निजी अस्पतालों में हर दिन औसतन 5-6 मामले सामने आ रहे हैं। हमीदिया अस्पताल और कैलाशनाथ काटजू अस्पताल समेत कई अस्पतालों में युवतियां और महिलाएं गंभीर हालत में पहुंच रही हैं—जो इस समस्या की भयावहता को दिखाता है।
अधूरा गर्भपात बन रहा जानलेवा
डॉक्टरों के मुताबिक, बिना सही जांच और निगरानी के ली गई दवाओं से कई बार गर्भपात अधूरा रह जाता है। इससे अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण और शरीर का ब्लड प्रेशर गिरने लगता है। कई मामलों में शरीर का सिस्टम फेल हो जाता है—जो सीधे तौर पर जान के लिए खतरा बन जाता है।
मेडिकल स्टोर्स पर नियमों की अनदेखी
गाइडलाइन होने के बावजूद मेडिकल स्टोर्स पर इन दवाओं की बिक्री पर सख्ती नहीं है। बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाएं आसानी से मिल रही हैं—यहां तक कि पुरुषों को भी ये दवाएं दे दी जाती हैं। यही लापरवाही इस संकट को और बढ़ा रही है।
डॉक्टरों की चेतावनी: यह वैज्ञानिक प्रक्रिया है
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति खरे का कहना है कि गर्भपात एक पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसके लिए पहले सोनोग्राफी और जरूरी जांच जरूरी होती है, तभी दवा दी जाती है। बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना न सिर्फ गलत है, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है—और यही सबसे बड़ा जोखिम है।
एनीमिया और कमजोरी का बढ़ता खतरा
अत्यधिक रक्तस्राव के कारण कई महिलाएं एनीमिया का शिकार हो रही हैं। शरीर में खून की कमी होने से कमजोरी, चक्कर और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं—जो लंबे समय तक असर डाल सकती हैं।
जागरूकता और सख्ती दोनों जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए दो चीजें बेहद जरूरी हैं—जागरूकता और सख्त नियमों का पालन। जब तक महिलाएं और युवतियां खुद सतर्क नहीं होंगी और मेडिकल स्टोर्स पर सख्ती नहीं होगी, तब तक यह खतरा बना रहेगा—और यही सबसे बड़ी चिंता है।
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