
भोपाल में नवजात शिशुओं की मौतों को लेकर प्रशासन अब और सख्त हो गया है। जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि विशेष नवजात देखभाल इकाई (SNCU) में होने वाली हर मृत्यु की गहराई से जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा, नवजात सुरक्षा बनी प्राथमिकता
कलेक्टर कार्यालय में आयोजित बैठक में जिले के प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार से आकलन किया गया। अधिकारियों से साफ कहा गया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लापरवाही की गुंजाइश नहीं है। बैठक में स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पेश की। प्रशासन का मुख्य फोकस नवजात मृत्यु दर कम करने और सुरक्षित प्रसव सेवाओं को मजबूत करने पर रहा।
SNCU में हर मौत की होगी गहन जांच
अब एसएनसीयू में होने वाली हर शिशु मृत्यु का डेथ ऑडिट अनिवार्य होगा। इस ऑडिट में सिर्फ अस्पताल की स्थिति ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था के दौरान आई जटिलताएं, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, समय पर जांच और प्रसव के दौरान हुए घटनाक्रम भी शामिल किए जाएंगे। इस कदम का उद्देश्य यह समझना है कि किन कारणों से नवजात मौतें हो रही हैं और क्या उन्हें पहले रोका जा सकता था।
ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम में AI आधारित इन्फेक्शन कंट्रोल
बैठक में अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम की चेकलिस्ट का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन अब एआई आधारित तकनीक अपनाने की दिशा में भी काम करने पर विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि इससे मानवीय गलतियों में कमी आएगी और प्रसव या ऑपरेशन के दौरान संक्रमण का खतरा घटेगा।
टीकाकरण, एएनसी पंजीयन और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर विशेष फोकस
बैठक में टीकाकरण अभियान को और प्रभावी बनाने, लाभार्थियों से फीडबैक लेने और एएनसी पंजीयन बढ़ाने की बात कही गई। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें उचित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के लिए रेफरल सिस्टम को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। प्रशासन का मानना है कि शुरुआती स्तर पर सही निगरानी से नवजात मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बुजुर्गों के लिए ‘होप’ कार्यक्रम की भी समीक्षा
जिले में बुजुर्गों के लिए चल रहे होप कार्यक्रम की प्रगति भी बैठक में सामने आई। करीब 902 वृद्धजनों की पहचान की गई है, जिनमें से सैकड़ों को घर-घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा चुकी हैं। गंभीर मरीजों की नियमित अंतराल पर होम विजिट कर निगरानी की जा रही है।
पोषण सेवाओं में संयुक्त रणनीति पर जोर
जिला पोषण समिति की समीक्षा के दौरान गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि मातृ और शिशु स्वास्थ्य में समग्र सुधार लाया जा सके।
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