
मकर संक्रांति अभी आई भी नहीं और मध्य प्रदेश में चाइनीज मांझे ने अपना तांडव शुरू कर दिया है। हर साल की तरह इस बार भी पुलिस की सख्ती और कार्रवाई के दावों के बावजूद सड़कों पर मौत बनकर लहराता यह प्रतिबंधित मांझा लोगों की जिंदगी तबाह कर रहा है। ताजा मामला छिंदवाड़ा जिले के गुरैया बायपास का है, जहां पिता को लेने जा रहे 24 साल के युवक की गर्दन में चाइनीज मांझा उलझ गया। कुछ ही सेकेंड में हंसता-खेलता परिवार मातम में बदल गया। फिलहाल युवक अस्पताल के ICU में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
पिता को लेने निकला था राहुल, मौत बनकर लिपट गया मांझा
छिंदवाड़ा निवासी 24 वर्षीय राहुल अपने पिता को घर लाने के लिए बाइक से गुरैया बायपास की ओर निकला था। रास्ते में अचानक हवा में लहराता हुआ अदृश्य चाइनीज मांझा उसके गले में आ फंसा। राहुल को कुछ समझने का मौका भी नहीं मिला और धारदार मांझे ने उसकी गर्दन को गहराई तक रेत दिया। तेज दर्द और झटके के कारण उसकी बाइक अनियंत्रित हो गई और वह सड़क पर गिर पड़ा। आसपास के लोगों ने खून से लथपथ राहुल को देखा तो तुरंत निजी अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए ICU में भर्ती कर दिया।
गला बुरी तरह कटा, कंधे और पसली भी टूटी
अस्पताल के चिकित्सक मनन गोगिया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि राहुल की हालत बेहद नाजुक है। मांझे से उसका गला बहुत गहराई तक कट गया है और वहां खून का थक्का जम गया है। सड़क पर गिरने के कारण उसके कंधे की हड्डी टूट गई है और एक पसली भी फ्रैक्चर हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक देर रात ऑपरेशन की तैयारी की गई, जिसमें करीब 15 टांके आने की संभावना है। अंदरूनी चोटों और खून के जमाव के चलते राहुल को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है। परिवार के लोग ICU के बाहर भगवान से उसकी जिंदगी की दुआ मांग रहे हैं।
एक हफ्ते पहले भी छिंदवाड़ा में हुआ था बड़ा हादसा
यह पहला मामला नहीं है। महज एक हफ्ते पहले छिंदवाड़ा में ही चाइनीज मांझे ने एक और जिंदगी तबाह कर दी थी। बेनटेक्स ज्वेलरी बेचने वाले रामगिरी गोस्वामी चाइनीज मांझे की चपेट में आ गए थे। मांझे से उनका गला इस कदर कट गया कि आहार नली तक दिखाई देने लगी। हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों को अलग-अलग समय पर तीन ऑपरेशन करने पड़े। तब जाकर उनकी जान बचाई जा सकी। फिलहाल रामगिरी खतरे से बाहर हैं, लेकिन उन्हें तीन महीने तक पूरी तरह बेड रेस्ट की सलाह दी गई है। उनके गले में कुल 43 टांके लगाए गए हैं। यह घटना 2 जनवरी की बताई जा रही है।
बच्चे का कान कटा, फिर भी नहीं थम रहा मांझा
चाइनीज मांझे की दहशत यहीं खत्म नहीं होती। बीते दिनों इसी जिले में एक मासूम बच्चे का कान भी चाइनीज मांझे से कट चुका है। हर साल यही हालात होते हैं – पुलिस छापे मारती है, दुकानों पर कार्रवाई होती है, लेकिन मकर संक्रांति आते-आते ये जानलेवा मांझा फिर बाजारों और गलियों में दिखने लगता है। कागजों में चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध है, लेकिन हकीकत यह है कि खुलेआम इसकी बिक्री हो रही है। इसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
सवालों के घेरे में सिस्टम, कब थमेगा ये सिलसिला?
लगातार हो रही इन घटनाओं ने पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर हर साल चेतावनी और कार्रवाई के बाद भी चाइनीज मांझा बाजार में कैसे पहुंच जाता है? क्या सिर्फ त्योहार के वक्त ही कार्रवाई करना काफी है? छिंदवाड़ा की ये तीन घटनाएं साफ बताती हैं कि अब यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जानलेवा अपराध बन चुका है। जरूरत है कि प्रशासन स्थायी समाधान निकाले, वरना हर मकर संक्रांति के साथ ऐसी ही दर्दनाक खबरें सामने आती रहेंगी।
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