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विटिलिगो (सफेद दाग) अनुसंधान में एम्स भोपाल को मिली कामयाबी, शोधार्थी को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फैलोशिप

11 नव, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
एम्स भोपाल

एम्स भोपाल

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डेस्क रिपोर्टर

भोपाल। एम्स भोपाल अपने नवीन शोध कार्यों और सामाजिक रूप से उपयोगी अध्ययनों के माध्यम से चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा प्रदान कर रहा है, जिससे संस्थान के शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। इसी क्रम में अनम खान, जो एम्स भोपाल के बायोकैमिस्ट्री विभाग और बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में संयुक्त रूप से पीएच.डी. शोध कर रही हैं, ने विटिलिगो (सफेद दाग) की जैवरासायनिक समझ विकसित करने के लिए सीएसआईआर डायरेक्ट सीनियर रिसर्च फैलोशिप (SRF) और एमपी काउंसिल अवार्ड प्राप्त किया है। 


विटिलिगो एक त्वचा संबंधी स्थिति है, जिसमें शरीर के विभिन्न भागों पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं। यह समस्या किसी भी आयु अथवा लिंग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। इस शोध का उद्देश्य यह समझना था कि डीएनए की मरम्मत करने वाली प्रक्रिया बेस एक्सिशन रिपेयर (BER) से संबंधित जीन में पाए जाने वाले आनुवंशिक परिवर्तन विटिलिगो के विकास में क्या भूमिका निभाते हैं। साथ ही, इसमें यह भी अध्ययन किया गया कि विटिलिगो से प्रभावित मरीजों में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस अर्थात शरीर में बनने वाले हानिकारक रसायनों का स्तर, स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में कितना अधिक है। अध्ययन में पाया गया कि विटिलिगो प्रभावित व्यक्तियों में जिंक और कॉपर जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तथा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का स्तर अधिक पाया जाता है। ये निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि भविष्य में इससे व्यक्तिगत उपचार की दिशा में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। यदि शरीर में जिंक और कॉपर का संतुलन बनाए रखा जाए तथा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम किया जाए, तो त्वचा में पुनः रंजकण (Repigmentation) की संभावना बढ़ सकती है।

उनका शोध कार्य प्रो. अश्विन कोटनिस (बायोकैमिस्ट्री विभाग, एम्स भोपाल), प्रो. रागिनी गोथलवाल (बायोटेक्नोलॉजी विभाग, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय) और डॉ. प्रशंसा जायसवाल (डर्मेटोलॉजी विभाग, एम्स भोपाल) के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। बायोकैमिस्ट्री विभागाध्यक्ष प्रो. जगत राकेश कंवर ने बताया कि अनम एम्स भोपाल की पहली सीएसआईआर डायरेक्ट फेलो हैं। उन्होंने कहा कि विटिलिगो अनुसंधान भविष्य में व्यक्तिगत उपचार विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। 
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर ने अनम को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उन्हें नवीन उपचार पद्धतियों और बायोमेडिकल शोध दिशा में आगे बढ़ते रहने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विटिलिगो के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के उनके प्रयासों की भी सराहना की। उप-निदेशक (प्रशासन) संदेश कुमार जैन ने अनम खान को उनके अनेक उच्च प्रभावशाली शोध प्रकाशनों के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


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