
भोपाल। संतान की चाह रखने वाले लेकिन महंगे इलाज के कारण परेशान दंपतियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। भोपाल के एम्स में जल्द ही प्रदेश का पहला सरकारी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) सेंटर शुरू होने जा रहा है, जहां कम लागत में आधुनिक तकनीक के साथ उपचार उपलब्ध होगा।
एम्स भोपाल बनेगा देश का तीसरा सरकारी IVF केंद्र
एम्स भोपाल में यह सुविधा मार्च के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की तैयारी में है। इसके शुरू होने के बाद यह दिल्ली और रायपुर के बाद देश का तीसरा सरकारी संस्थान होगा, जहां IVF जैसी उन्नत प्रजनन तकनीक उपलब्ध होगी। इस कदम से खासतौर पर उन दंपतियों को फायदा मिलेगा जो निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के कारण उपचार नहीं करा पाते।
निजी अस्पतालों की तुलना में काफी कम खर्च
मध्य प्रदेश में हर साल करीब 10 हजार दंपती IVF उपचार के लिए निजी केंद्रों का सहारा लेते हैं। निजी अस्पतालों में एक IVF साइकिल का खर्च लगभग 1.5 लाख से 3 लाख रुपए तक पहुंच जाता है। जबकि एम्स भोपाल में यही इलाज लगभग 50 हजार से 80 हजार रुपए के बीच उपलब्ध होगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए भी उपचार संभव हो सकेगा।
20 करोड़ की लागत से तैयार हुआ आधुनिक सेंटर
इस IVF सेंटर को केंद्र सरकार की मदद से करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया गया है। यहां कई अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जैसे: आधुनिक IVF लैब, एम्ब्रियो फ्रीजिंग की सुविधा, हाई-एंड इन्क्यूबेटर, एडवांस्ड फर्टिलिटी टेक्नोलॉजी। इन सुविधाओं की मदद से इलाज की गुणवत्ता निजी संस्थानों के बराबर रखी जाएगी।
डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए AI आधारित स्किल लैब
एम्स भोपाल में डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने के लिए डिजिटल स्किल लैब भी बनाई गई है। इस लैब में AI आधारित सिम्युलेटर, भ्रूण ट्रांसफर (Embryo Transfer) का अभ्यास और हिस्टेरोस्कोपी जैसी प्रक्रियाओं की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे डॉक्टर जटिल प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से सीख सकें।
दिसंबर में पूरा हुआ तकनीकी परीक्षण
IVF सेंटर की तकनीकी तैयारियों और उपकरणों का परीक्षण दिसंबर में पूरा किया जा चुका है। एम्स भोपाल के डायरेक्टर डॉ. माधवानंद कर के अनुसार, यह सुविधा उन दंपतियों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित होगी जो आर्थिक कारणों से इलाज नहीं करा पा रहे थे।
उम्र के साथ बदलती है IVF की सफलता दर
विशेषज्ञों के अनुसार IVF की सफलता काफी हद तक महिला की उम्र पर निर्भर करती है। उम्र बढ़ने के साथ गर्भधारण की संभावना कम होती जाती है।
21 से 30 वर्ष
सफलता दर: 65–70%
निजी खर्च: लगभग 1.5 लाख रुपये
सरकारी खर्च: 40–45 हजार रुपये
30 से 35 वर्ष
सफलता दर: 50–55%
निजी खर्च: करीब 2 लाख रुपये
सरकारी खर्च: 50–55 हजार रुपये
35 से 40 वर्ष
सफलता दर: 30–35%
निजी खर्च: लगभग 2.5 लाख रुपये
सरकारी खर्च: 60 हजार रुपये
45 से 50 वर्ष
सफलता दर: 20–30%
निजी खर्च: करीब 3 लाख रुपये
सरकारी खर्च: 80 हजार रुपये
डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते उपचार शुरू करने से सफलता की संभावना अधिक रहती है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

