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AIIMS भोपाल में जांच के लिए महीनों का इंतजार, MRI-CT Scan की वेटिंग से मरीज बेहाल

04 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
AIIMS भोपाल में जांच के लिए महीनों का इंतजार, MRI-CT Scan की वेटिंग से मरीज बेहाल
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल का एम्स देश के प्रतिष्ठित सरकारी अस्पतालों में गिना जाता है, लेकिन यहां इलाज से पहले जांच कराना ही मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हालत यह है कि MRI, CT Scan और सोनोग्राफी जैसी जरूरी जांचों के लिए मरीजों को 3 से 4 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। गंभीर बीमारी की आशंका वाले मरीज भी लंबी वेटिंग लिस्ट में फंस रहे हैं। ऐसे में कई मरीजों का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पाता और बीमारी बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।


जांच के लिए रेलवे जैसी वेटिंग व्यवस्था

एम्स भोपाल में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टर जांच लिख देते हैं, लेकिन जब मरीज संबंधित विभाग में पहुंचते हैं तो उन्हें कई महीनों बाद की तारीख मिलती है। सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को होती है जिन्हें तत्काल जांच की जरूरत होती है। कई मामलों में मरीज दवा लेकर घर लौट जाते हैं और निर्धारित तारीख का इंतजार करते रहते हैं।


अर्जेंट केस में भी 4 महीने का इंतजार

कोलार निवासी 40 वर्षीय महिला गॉल ब्लैडर स्टोन के इलाज के लिए एम्स पहुंचीं। डॉक्टर ने फॉर्म पर "इमरजेंसी" में CT Scan कराने की सलाह दी। इसके बावजूद उन्हें जांच के लिए 3 सितंबर की तारीख दी गई। परिवार ने जल्दी जांच का अनुरोध किया तो स्टाफ ने बताया कि अर्जेंट केस होने के कारण जल्दी तारीख मिली है, अन्यथा और लंबा इंतजार करना पड़ सकता था।


पेट दर्द के मरीज को तीन महीने बाद की मिली MRI डेट 

ओबैदुल्लागंज के एक मरीज को लगातार पेट दर्द और तेजी से वजन घटने की शिकायत थी। डॉक्टरों ने गंभीर बीमारी की आशंका जताते हुए तत्काल MRI कराने की सलाह दी। लेकिन जांच के लिए उन्हें लगभग तीन महीने बाद की तारीख मिली। इससे बीमारी की सही स्थिति जानने में देरी हुई और चिंता बढ़ती रही।


कमर दर्द से परेशान मरीज की बीमारी बढ़ी

सीहोर निवासी एक व्यक्ति लंबे समय से कमर दर्द, बुखार और पैरों में कमजोरी की समस्या से जूझ रहे थे। डॉक्टरों ने स्पाइन टीबी की आशंका जताकर तत्काल MRI कराने को कहा, लेकिन उन्हें भी लगभग चार महीने बाद की तारीख दी गई। रिपोर्ट आने और इलाज शुरू होने तक उनकी हालत और बिगड़ चुकी थी।


सिरदर्द की शिकायत, जांच के लिए महीनों का इंतजार

विदिशा की एक महिला को लगातार सिरदर्द, चक्कर और धुंधला दिखाई देने की समस्या थी। न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ ने गंभीर बीमारी की संभावना को देखते हुए MRI कराने की सलाह दी, लेकिन उन्हें जांच के लिए करीब तीन महीने का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उनकी परेशानी लगातार बढ़ती रही।


दूसरे अस्पतालों में मिल रही तत्काल सुविधा

एम्स भोपाल में जहां मरीजों को महीनों इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं शहर के अन्य सरकारी अस्पतालों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है। जयप्रकाश जिला अस्पताल सहित कुछ संस्थानों में MRI जांच उसी दिन हो जाती है और कई मामलों में 2 घंटे के भीतर रिपोर्ट भी उपलब्ध करा दी जाती है। यही वजह है कि एम्स की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।


आखिर क्यों बढ़ रही है वेटिंग?

एम्स भोपाल प्रशासन का कहना है कि बढ़ती मरीज संख्या इसकी सबसे बड़ी वजह है। अधीक्षक डॉ. विकास गुप्ता के अनुसार अस्पताल में MRI की केवल दो मशीनें हैं। एक जांच में लगभग एक घंटा लगता है। रोजाना करीब 6 हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। यदि सिर्फ 1 प्रतिशत मरीजों को भी MRI की जरूरत पड़ती है तो यह संख्या करीब 60 मरीज प्रतिदिन हो जाती है, जबकि उपलब्ध मशीनों से 45 से 48 जांच ही संभव हो पाती हैं।


मरीजों की चिंता बढ़ा रही व्यवस्था

विशेषज्ञ मानते हैं कि गंभीर बीमारियों में समय पर जांच इलाज का सबसे अहम हिस्सा होती है। जांच में देरी का सीधा असर मरीज की सेहत और उपचार की सफलता पर पड़ सकता है।


ऐसे में सवाल यह है कि देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल AIIMS भोपाल बढ़ती मांग और सीमित संसाधनों के बीच इस चुनौती से कैसे निपटेगा। फिलहाल मरीजों की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि बीमारी से पहले उन्हें लंबी वेटिंग से लड़ना पड़ रहा है।

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