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दुग्ध उत्पादन, संकलन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में एमपी को अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य: लखन पटेल

27 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
Minister lakhan Patel

Minister lakhan Patel

Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल ने शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभा हॉल में प्रदेश सरकार के 2 वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाई और आगामी 3 वर्ष की योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में दुग्ध उत्पादन, दुग्ध संकलन और दुग्ध प्रसंस्करण के क्षेत्र में अपने प्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्यमंत्री ने कहा कि गौवंश के अवैध परिवहन पर वाहन राजसात किए जाएंगे। 

राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने व पशुपालकों की आय में वृद्धि एवं किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये निरंतर प्रयास कर रही है। पिछले 02 वर्षों में प्रदेश ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के पथ पर निरंतर प्रगति की है। हमारी सरकार ने गौवंश के संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में निराश्रित पशुओं के लिए नवीन गौशाला नीति बनाई है। 

 

प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी उमाकांत उमराव, संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पीएस पटेल, प्रबंध संचालक मध्य प्रदेश सहकारी दुग्ध संघ सांची डॉ. संजय गोवानी, प्रबंध संचालक मध्य प्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम डॉ. सत्य निधि शुक्ला और रजिस्ट्रार नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर डॉ. एसएस तोमर उपस्थित रहे। संचालन डॉ. अनुपम अग्रवाल ने किया।

 

गौवंश की संख्या के मामले में एमपी का देश में दूसरा स्थान

राज्यमंत्री ने कहा कि गौवंश की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश का देश में दूसरा स्थान है। प्रदेश के 1.87 करोड़ गौवंश में से लगभग 70 प्रतिशत गौवंश अवर्णित नस्ल के हैं। शासन के निराश्रित गौवंश के व्यवस्थापन के लिए लगभग 2500 से अधिक गौशालाओं में 4 लाख 75 हजार से अधिक निराश्रित गौवंश को आश्रय दिया है। इसके अतिरिक्त गौशालाओं में निराश्रित गौवंश के व्यवस्थापन के लिए दिए जाने वाले अनुदान की राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रूपये प्रतिदिन/गौवंश की गई है। गौशालाओं के अनुदान के बजट को 250 करोड प्रति वर्ष से बढ़ाकर 505 करोड़ कर दिया गया है, जिसमे से 369.02 करोड़ की राशि गौशालाओ को वितरित की जा चुकी है। सरकार ने 'स्वावलंबी गौशालाओं (कामधेनु निवास) की स्थापना नीति 2025' लागू की है। निवेशकों को परियोजनाओं की स्थापना के लिए 5 हजार गौवंश के लिए अधिकतम 130 एकड़ भूमि उपयोग हेतु दी जाएगी। साथ ही प्रत्येक 1000 गौवंश की वृद्धि पर 25 एकड़ दी जा सकेगी। इस योजना में 20 स्वावलम्बी गौशाला की स्थापना हेतु निविदा जारी की गयी, जिसकी अंतिम दिनांक 29 दिसम्बर है।

 

ये उपलब्धियां गिनाई 

 

. दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की भागीदारी 09 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने के उददेश्य से अभिनव योजना "डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना" प्रारंभ की गई है। 

 

. सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड को उन्नयन करने के उद्देश्य से एमपी स्टेट को-ओपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड व संबद्ध दुग्ध संघों के संचालन और प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश शासन, एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड व संबद्ध दुग्ध संघों और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य होने वाले सहकार्यता अनुबंध पर सहमति दी गई।  

 

. प्रदेश में पशुपालकों को समृद्ध करने के लिए "हिरण्यगर्भा अभियान" संचालित किया जा रहा है। 

 

. संचालनालय पशुपालन एवं डेयरी अंतर्गत पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के 70 पदों तथा सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों के 589 पदों पर नियुक्ति दी गई। 

 

आगामी 03 वर्षों की कार्ययोजना

 

. दुग्ध उत्पादन की भागेदारी 09 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किए जाना। 

 

. 40 लाख प्रजनन योग्य गौ भैंस वंशीय पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा।

 

. 20 लाख सेक्स संटिड सीमन डोसेस से गौ/भैंस वंशीय पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा।

 

. 9000 नवीन ग्राम पंचायतों में अतिरिक्त मैत्रियों को प्रशिक्षण प्रदाय किया जाएगा।

 

. ब्रीडर एसोसिएशन का विस्तार किया जाएगा।

 

. प्रत्येक वर्ष दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान संचालित किया जाएगा।

 

. 18 हजार ग्राम पंचायतों को क्षीरधारा ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा।

 

. 50 नवीन स्वावलंबी गौ शालाएं स्थापित की जाएंगी।

 

. कृत्रिम गर्भाधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

 

. ऐसे पशुपालक जो अन्य पशुपालकों के लिए उदाहरणीय एवं प्रेरणास्पद हैं। उन्हें 'पशुपालन आचार्य' की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा।

 

. ऐसे कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता जो अन्य कार्यकर्ताओं के लिए अनुकरणीय हैं उन्हें 'क्षीरधारा रत्न' की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा।

 

. गोकुल ग्राम पशु प्रजनन प्रक्षेत्र में हिफर रियरिंग सेन्टर की स्थापना कर लगभग 250 उच्च अनुवंशीकीय हिफर प्रति वर्ष पशुपालकों को विक्रय दर पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

 

. सहकारिता अंतर्गत ग्रामों का कवरेज आगामी 3 वर्षों में बढ़ाकर 15 हजार से अधिक ग्रामों को कवर किया जाएगा। प्रदेश में औसत दुग्ध संकलन तीन वर्षों में 33 लाख लीटर प्रतिदिन से अधिक होगा।





 

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