
भोपाल की हवा में एक बार फिर घुटन साफ महसूस की जा सकती है। सुबह टहलने निकलिए तो आंखों में जलन, गले में खराश और धुंध की चादर आपका स्वागत करती है। यही वजह है कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने मध्य प्रदेश के बढ़ते प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाया है। भोपाल और इंदौर के साथ राज्य के 8 शहरों में लगातार खराब होती हवा को लेकर NGT ने चिंता जताई है और राज्य सरकार से 8 हफ्तों में पूरी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
NGT का नोटिस: 8 हफ्तों में मांगी पूरी रिपोर्ट
NGT ने मध्य प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर को हल्के में नहीं लिया जा सकता। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक ज्वाइंट कमेटी भी गठित की गई है, जो इन शहरों की स्थिति का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी।
न्यायाधिकरण का साफ कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बल्कि सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य का संकट बन जाएगा।
भोपाल-इंदौर समेत ये 8 शहर प्रदूषण की चपेट में
NGT ने जिन शहरों को लेकर चिंता जताई है, उनमें शामिल हैं:
भोपाल
इंदौर
ग्वालियर
जबलपुर
उज्जैन
सिंगरौली
सागर
देवास
इन शहरों में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से कहीं ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) पहले ही इन्हें ‘नॉन-अटेनमेंट सिटी’ घोषित कर चुका है, यानी यहां तय समय में वायु गुणवत्ता मानकों को हासिल नहीं किया जा सका। साल 2016 में यह संख्या 6 शहरों तक सीमित थी, लेकिन अब यह बढ़कर 8 हो गई है, जो हालात की गंभीरता को दिखाता है।
कितनी खराब है हवा? जानिए AQI और खतरनाक आंकड़े
भोपाल सहित इन शहरों में:
PM10 का औसत स्तर: 130 से 190 माइक्रोग्राम/घनमीटर
PM2.5 का स्तर: 80 से 100 माइक्रोग्राम/घनमीटर
जबकि सुरक्षित सीमा इससे कहीं कम होनी चाहिए। राजधानी भोपाल में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई इलाकों में ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच चुका है।
PM2.5 के ये महीन कण सीधे फेफड़ों में जाकर सांस की बीमारियों, दमा, एलर्जी और हृदय रोगों का खतरा बढ़ाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है।
क्यों बिगड़ रही है MP की हवा?
विशेषज्ञों का कहना है कि इन शहरों में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं:
तेजी से बढ़ता ट्रैफिक और डीजल वाहन
निर्माण कार्यों से उड़ती धूल
औद्योगिक इकाइयों से निकलता धुआं
कचरा जलाने की बढ़ती घटनाएं
हरियाली और खुले क्षेत्रों की लगातार कटौती
सिंगरौली जैसे औद्योगिक इलाकों में कोयला आधारित पावर प्लांट भी प्रदूषण का बड़ा कारण बने हुए हैं।
NGT की चेतावनी: नहीं सुधरे हालात तो सख्त कार्रवाई
NGT ने स्पष्ट किया है कि 8 हफ्तों में मांगी गई रिपोर्ट में यह बताना होगा कि राज्य सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए और आगे क्या कार्ययोजना है। अगर सुधार की ठोस योजना सामने नहीं आई, तो न्यायाधिकरण कड़े निर्देश जारी कर सकता है। इस मामले में ज्वाइंट कमेटी सभी 8 शहरों में जाकर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करेगी और प्रदूषण कम करने के उपाय सुझाएगी।
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