
भोपाल। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार रात करीब 12 बजे भोपाल पहुंचे। स्टेट हैंगर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों ने उनकी अगवानी की।
शनिवार को राजधानी में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्य शामिल होंगे। कार्यक्रम में बोनस, गौशालाओं की सहायता, कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र और डेयरी परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम रखे गए हैं।
दिल्ली की व्यस्तता के कारण देर से रवाना हुए शाह
दिल्ली में कार्यक्रमों की व्यस्तता के चलते अमित शाह के भोपाल रवाना होने में करीब ढाई घंटे की देरी हुई। उनकी अगवानी के लिए स्टेट हैंगर पहुंचे मंत्री और विधायक बाद में वहां से वापस लौट गए।
रात करीब 12 बजे शाह भोपाल पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, डीजीपी कैलाश मकवाना, भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार और कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने उनका स्वागत किया।
35 हजार से ज्यादा गोपालक होंगे शामिल
भोपाल में होने वाले सम्मेलन में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्य पहुंचेंगे। इनमें भोपाल के साथ सीहोर, बैतूल, राजगढ़, हरदा, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन और नर्मदापुरम के प्रतिभागी शामिल हैं।
कार्यक्रम में कृषक कल्याण वर्ष के तहत किए गए कार्यों और बलराम कृषि महोत्सव से जुड़ी जानकारी शाह के सामने रखी जाएगी। इसके लिए गृह, पशुपालन एवं डेयरी, सहकारिता, लोक निर्माण और परिवहन विभाग अपनी योजनाओं का प्रस्तुतीकरण करेंगे।
पशुपालकों को बोनस, गौशालाओं को आर्थिक मदद
सम्मेलन के दौरान भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों को बोनस दिया जाएगा। कार्यक्रम में गौशालाओं के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान भी रखा गया है।
इसके साथ गोपालक दीदियों का सम्मान होगा। डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र भी लाभार्थियों को वितरित किए जाएंगे।
उज्जैन में 255 करोड़ का डेयरी प्लांट
डेयरी सेक्टर से जुड़े प्रोजेक्ट भी शाह के भोपाल दौरे का हिस्सा हैं। इनमें उज्जैन में 255 करोड़ रुपए की लागत वाला डेयरी प्लांट प्रमुख परियोजना है।
भोपाल दुग्ध संघ परिसर में तैयार फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट पर 16.80 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इसका इस्तेमाल दही, छाछ, लस्सी, श्रीखंड और मावा जैसे मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पादों की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाना है।
किसान और फार्मर आईडी का आंकड़ा क्या कहता है?
किसानों से जुड़े आंकड़ों के लिहाज से मध्यप्रदेश विधानसभा में सरकार ने 30 जून 2026 तक 1,11,88,295 किसानों की फार्मर आईडी बनाए जाने की जानकारी दी थी। सरकारी जवाब में कहा गया था कि बाकी किसानों की आईडी बनाने की प्रक्रिया जारी है।
मार्च 2026 तक केंद्र के आंकड़ों में मध्यप्रदेश में 1.04 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनने की जानकारी सामने आई थी। जून तक राज्य सरकार के आंकड़े में यह संख्या बढ़कर 1.11 करोड़ से ज्यादा हो गई।
किसान आईडी को किसान वोटर मानना सही नहीं
फार्मर आईडी की संख्या को सीधे किसान मतदाताओं की संख्या नहीं माना जा सकता। मतदाता सूची में लोगों को किसान और गैर-किसान के आधार पर अलग-अलग वर्गीकृत नहीं किया जाता।
इस कारण किसी जिले में किसान मतदाताओं की वास्तविक संख्या बताने वाला अलग आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। किसान आईडी और मतदाता सूची दो अलग-अलग प्रशासनिक रिकॉर्ड हैं।
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