शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
Logo
Madhaya Pradesh

सिंगापुर में आईटीबी एशिया के मंच से पर्यटकों को मध्यप्रदेश आने का दिया आमंत्रण…

23 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सिंगापुर में आईटीबी एशिया के मंच से पर्यटकों को मध्यप्रदेश आने का दिया आमंत्रण…
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक एवं सचिव डॉ. इलैया राजा टी. ने सिंगापुर के सैंड्स एक्सपो एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल ट्रेड शो ‘आईटीबी एशिया’ के नेशनल टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन टॉक सेशन में कहा कि वास्तविक ग्रामीण जीवन, सांस्कृतिक विविधता और आत्मीय आतिथ्य का अनुभव लेने के लिए पर्यटकों को मध्यप्रदेश आना चाहिए।


डॉ. इलैया राजा ने कहा कि कोविड महामारी के बाद पर्यटन की प्राथमिकताएं बदली हैं। अब पर्यटक पारंपरिक पर्यटन स्थलों से आगे बढ़कर नए और अनछुए गंतव्यों की तलाश कर रहे हैं। पर्यटन स्थलों पर भीड़ कम करने के लिए मांग का पुनर्वितरण और नए स्थानों की खोज जरूरी है। उन्होंने ‘रीडिस्ट्रिब्यूटिंग डिमांड थ्रू डिस्कवरी’ विषय पर प्रस्तुति देते हुए उन्होंने मध्यप्रदेश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा को रेखांकित किया। 


टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक एवं सचिव डॉ. इलैया राजा ने प्रदेश के 25 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र, प्रमुख जनजातीय समुदायों और चंदेरी-महेश्वरी वस्त्रकला, गोंड चित्रकला तथा भोपाल की जरी-जरदोजी शिल्प परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने पेंच नेशनल पार्क की ‘मोगली’ और ‘द जंगल बुक’ से जुड़ी पहचान, पेंच में नेचर वॉक तथा ओरछा में बेतवा नदी पर रिवर राफ्टिंग जैसे अनुभवों को भी पर्यटकों के लिए आकर्षण बताया।


सांची स्तूप, खजुराहो मंदिर व भीमबेटका का किया उल्लेख 

डॉ. इलैया राजा ने सांची स्तूप, खजुराहो मंदिर और भीमबेटका के शैलचित्रों सहित यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल और संभावित स्थलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑफबीट पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के लिए हेलीकॉप्टर पर्यटन सेवा का विस्तार किया जा रहा है। फिल्म पर्यटन, महिला सफारी चालकों और सर्व-महिला संचालित होटलों के माध्यम से भी पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।


स्थानीय खानपान और आतिथ्य का अनुभव लेने का न्योता

अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल समुदाय, टूर ऑपरेटरों और पर्यटकों को आमंत्रित करते हुए डॉ. इलैया राजा ने कहा कि मध्यप्रदेश का ग्रामीण पर्यटन स्थानीय समुदायों के सहयोग से संचालित होता है। इससे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन, परंपराओं और कला को करीब से जानने का अवसर मिलता है। उन्होंने मालवा के पोहा-जलेबी, रतलामी सेव, दाल-बाफला, मुरैना-ग्वालियर की गजक और मालवा-बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने का भी आग्रह किया।

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें