
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को पंडित कुंजीलाल दुबे के 130वें जन्मदिवस पर मध्यप्रदेश विधानसभा भवन परिसर में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप में पं. कुंजीलाल दुबे ने हिंदी भाषा को प्रतिष्ठित स्थान दिलाने में बड़ा योगदान दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पंडित कुंजीलाल दुबे तीन बार मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। उनके विधानसभा अध्यक्षीय कार्यकाल की सेवाओं और संसदीय परम्पराओं को और भी समृद्ध बनाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित कुंजीलाल दुबे की समाजोन्मुखी सेवाओं के लिए वर्ष 1964 में इन्हें पद्मभूषण की उपाधि विभूषित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्या और ज्ञान के क्षेत्र में की गई सेवाओं और उपलब्धियों के लिए पंडित कुंजीलाल दुबे को 1965 में एलएलडी की उपाधि दी गई। 1967 में विक्रम विश्वविद्यालय ने इन्हें डी-लिट की उपाधि प्रदान की थी। वे सदैव हमारी स्मृतियों में बने रहेंगे।
पुष्पांजलि कार्यक्रम में इन्होंने भी दी श्रद्धांजलि
पुष्पांजलि कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, विधायक भगवानदास सबनानी, प्रमुख सचिव विधानसभा अरविन्द शर्मा और भूतपूर्व विधानसभा अध्यक्ष पं. कुंजीलाल दुबे के परिजन सहित विधानसभा के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे।
नरसिंहपुर जिल में हुआ था कुंजीलाल दुबे का जन्म
पंडित कुंजीलाल दुबे का जन्म 19 मार्च 1896 को वर्तमान नरसिंहपुर जिले के ग्राम आमगांव में हुआ था। वकालत के पेशे से एक सुघड़ राजनीतिज्ञ के रूप स्थापित होकर वह प्रथम विधानसभा (1956-57), द्वितीय विधानसभा (1957-62) एवं तृतीय विधानसभा (1962-67) में कुल तीन बार मप्र विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सेवारत रहे।
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