
भोपाल। भारतीय संगीत जगत की सबसे बहुमुखी आवाजों में से एक आशा भोंसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनके जाने से एक युग का अंत हो गया, लेकिन मध्य प्रदेश से जुड़ी उनकी यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।
इंदौर से जुड़ा भावनात्मक रिश्ता
इंदौर को हमेशा लता मंगेशकर की जन्मभूमि के रूप में जाना गया। इसी कारण आशा ताई को भी यहां के लोग अपनी बेटी जैसा स्नेह देते थे। यह रिश्ता सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि भावनाओं का था—जो उनके हर दौरे में झलकता था।
खंडवा के ‘संगीतिक परिवार’ का नाता
किशोर कुमार का शहर खंडवा भी आशा जी के लिए खास रहा। उनकी शादी आर.डी. बर्मन (पंचम दा) से हुई थी, जिनका किशोर कुमार से गहरा पारिवारिक रिश्ता था। इस वजह से खंडवा उनके लिए एक तरह से “ससुराल” जैसा सम्मानित स्थान बन गया था—जो इस जुड़ाव को और खास बनाता है।
जब भोपाल में थम गई थी रात
भोपाल में साल 2011 का वह यादगार पल आज भी लोगों को याद है। मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के कार्यक्रम में देर रात तक इंतजार के बाद जैसे ही आशा ताई मंच पर आईं, पूरा माहौल मंत्रमुग्ध हो गया। उन्होंने खुद कहा था कि उन्हें भोपाल की झीलें और यहां की शांति बेहद पसंद आई—और यही बात उनके दिल के जुड़ाव को दिखाती है।
सादगी जिसने दिल जीत लिए
वरिष्ठ कला समीक्षक विनय उपाध्याय के अनुसार, आशा जी सिर्फ महान गायिका ही नहीं, बल्कि बेहद सरल इंसान भी थीं। एक मुलाकात में उन्होंने जिस आत्मीयता से हाथ थामा और युवा कलाकारों को प्रेरित किया, वह उनके व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाता है—जहां इंसानियत उनके हुनर से भी बड़ी नजर आती है।
‘लता मंगेशकर सम्मान’ से जुड़ी भावनाएं
साल 1989 में जब उन्हें मध्य प्रदेश सरकार का प्रतिष्ठित ‘लता मंगेशकर सम्मान’ मिला, तो वे भावुक हो उठी थीं। उन्होंने कहा था कि यह सम्मान उन्हें “घर वापसी” जैसा एहसास कराता है। यह बयान बताता है कि एमपी उनके लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव की भूमि था।
संगीत का युग खत्म, यादें अमर
आशा भोंसले के जाने से भारतीय संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय खत्म हो गया है। लेकिन उनके गीत, उनकी आवाज और मध्य प्रदेश से जुड़ी उनकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी—और यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है।
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